भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं थम गईं
भाजपा में बदलाव की स्थिति
भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं अचानक ठंडा हो गई हैं। न केवल संगठन में, बल्कि सरकार में भी किसी प्रकार के फेरबदल की बातें सुनाई नहीं दे रही हैं। नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए पांच महीने हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक अपनी टीम का गठन नहीं किया है। उनकी टीम में अभी भी जेपी नड्डा के लोग शामिल हैं।
कांग्रेस ने जिन राज्यों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए हैं, वहां तुरंत कमेटियों का गठन किया गया है, लेकिन केंद्रीय स्तर पर ऐसा नहीं हो पाया है। पार्टी के प्रभावशाली महासचिव तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया है, जिसके बाद उनके केंद्रीय मंत्री बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। पंजाब में अगले साल चुनाव होने हैं, जहां वे प्रभारी हैं।
भाजपा के महासचिव विनोद तावड़े के बारे में भी केंद्रीय मंत्री बनने की चर्चा चल रही है। जब नितिन नबीन ने अध्यक्ष पद संभाला था, तब यह कहा गया था कि तरुण चुघ और तावड़े संगठन में बने रहेंगे। महासचिवों में से राधामोहन दास अग्रवाल के बदले जाने की बात भी चल रही थी। सुनील बंसल को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाने की चर्चा भी थी।
सरकार के कई सदस्यों को संगठन में लाने और नितिन नबीन की नई टीम बनाने की बातें हो रही थीं। उत्तर प्रदेश से नए नेता को राष्ट्रीय संगठन में लाने की योजना थी, लेकिन अब ये सभी चर्चाएं अचानक थम गई हैं। 20 जून तक सरकार और संगठन में बदलाव की उम्मीद थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद तीसरी सरकार के दो साल पूरे होने का जश्न मनाया था, लेकिन अब बदलाव की चर्चा नहीं हो रही है। इसके बजाय, अगले मानसून सत्र में होने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रम की चर्चाएं बढ़ गई हैं।