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भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए नेताओं की होड़

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस इस दौड़ में शामिल हैं। जानें और कौन से नेता इस महत्वपूर्ण पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। क्या ये नेता अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर पाएंगे? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
 

संसदीय बोर्ड में शामिल होने की चाहत


भाजपा के कई प्रमुख नेता संसदीय बोर्ड में स्थान पाने के लिए प्रयासरत हैं। जो लोग संगठन या सरकार में पहले से ही हैं, वे भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री इस प्रक्रिया में शामिल हैं। हालांकि, संसदीय बोर्ड का महत्व अब पहले जैसा नहीं रहा। पहले, इसका सदस्य होना शीर्ष नेतृत्व का प्रतीक माना जाता था। लेकिन हाल के बदलावों में, नए सदस्यों में से केवल बीएस येदियुरप्पा ही ऐसे हैं जो अपने राज्य के शीर्ष नेताओं में से एक माने जा सकते हैं।


हालांकि, भाजपा के पदाधिकारियों और केंद्रीय मंत्रियों की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही है। फिर भी, जो नेता अपने दम पर प्रभावशाली हैं, वे अपने राजनीतिक कद को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।


इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस संसदीय बोर्ड में शामिल होने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। दोनों अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। सीएम रहते हुए शिवराज सिंह चौहान को बोर्ड में शामिल किया गया था, लेकिन उसके बाद किसी अन्य मुख्यमंत्री को यह अवसर नहीं मिला।


हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि इन दो प्रमुख मुख्यमंत्रियों में से किसी को भी स्थान मिले। संभव है कि रेखा गुप्ता को शामिल किया जाए, जिससे महिला और मुख्यमंत्री दोनों का कोटा पूरा हो सके। शुभेंदु अधिकारी, हिमंत बिस्वा सरमा और नायब सिंह सैनी के नाम भी चर्चा में हैं।


इसके अलावा, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का नाम आदिवासी प्रतिनिधित्व के लिए चर्चा में है। संगठन महामंत्री के अलावा एक और महामंत्री को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। विनोद तावड़े को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दलित समुदाय से यूपी या बिहार के किसी जाटव या रविदास समाज के नेता को भी स्थान मिल सकता है। केंद्रीय मंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल के नाम भी चर्चा में हैं। अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिए पंजाब से किसी सिख नेता को भी शामिल किया जा सकता है।