भारत-अमेरिका के बीच मजबूत वैश्विक साझेदारी: विदेश मंत्रालय का बयान
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंध
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका (US) के बीच एक मजबूत और व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जो साझा हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दोनों देशों के रिश्ते कई चुनौतियों का सामना कर चुके हैं, लेकिन भारत को विश्वास है कि यह साझेदारी भविष्य में और भी गहरी होगी।
टैरिफ पर सरकार का बयान
रणधीर जायसवाल ने कहा कि टैरिफ के मुद्दे पर सरकार की ओर से एक बयान जारी किया गया है। व्हाइट हाउस के वक्तव्य के संबंध में उन्होंने सुझाव दिया कि इस पर सीधे व्हाइट हाउस से संपर्क करना बेहतर होगा।
वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की मजबूती
वैश्विक रणनीतिक साझेदारी
जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच यह साझेदारी साझा हितों, लोकतंत्र और जन-जन के मजबूत संबंधों पर आधारित है। इस साझेदारी ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं, फिर भी दोनों देशों ने अपने ठोस एजेंडे पर ध्यान केंद्रित रखा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी प्रतिबद्धताओं के प्रति गंभीर हैं और यह रिश्ता भविष्य में और भी प्रगाढ़ होगा।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की मजबूती
मजबूत होते भारत-अमेरिका रक्षा संबंध
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों के मद्देनज़र भारत-अमेरिका समझौते के तहत हमारी साझेदारी और मजबूत होगी। यह स्पष्ट किया गया कि भारत की रक्षा आवश्यकताएं पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आकलनों पर आधारित हैं।
रूस के साथ भारत की साझेदारी
रूस के साथ भारत की साझेदारी पर दृष्टिकोण
जब रूस के साथ भारत के संबंधों पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचनाओं के बारे में पूछा गया, तो जायसवाल ने कहा कि भारत के द्विपक्षीय संबंध अपने आधार पर स्थापित हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं परखा जाना चाहिए। उन्होंने रूस के साथ भारत की साझेदारी को स्थिर और समय की कसौटी पर खरी बताया।
रूसी तेल की खरीद पर स्थिति
रूसी तेल की खरीद पर विवाद
कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि कुछ भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद बंद कर दी है। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के पास ऐसी कोई विशेष जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत ऊर्जा स्रोतों की जरूरतों को लेकर व्यापक दृष्टिकोण रखता है और बाजार की उपलब्धता तथा वैश्विक परिस्थिति पर सतत नजर रखता है।