भारत-अमेरिका संबंधों पर जयशंकर का बयान: आतंकवाद की चिंता प्रमुख
भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताएं
(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 29 सितंबर - विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि पड़ोसी देशों से उत्पन्न आतंकवाद भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत के साझेदार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो यह द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है। यह बयान अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी के संदर्भ में आया है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के समापन पर एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद में भारतीय-अमेरिकी और प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ नीति विशेषज्ञों को संबोधित किया।
इस संवाद का संचालन पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ‘एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के विशिष्ट फेलो डेनियल रसेल ने किया। जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों पर सवाल पूछे गए, विशेषकर व्यापार और शुल्कों से संबंधित घटनाक्रमों के बारे में। उन्होंने कहा, "अगर मैं व्यापक दृष्टिकोण से देखूं, तो कई देशों के अमेरिका के साथ संबंध कठिन हो गए हैं।"
उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार का उल्लेख किया, जो जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से हुआ है। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा, "भारत जैसे कुछ देशों को पड़ोसी देशों से जानबूझकर और सुनियोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है।"
पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "यदि हमारे लिए महत्वपूर्ण मुद्दे को समझा नहीं जाता है, तो इससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनके साझेदार उनकी चिंताओं को नहीं समझते हैं, तो इससे संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
व्हाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जिनमें शुल्क, व्यापार, और पाकिस्तान के साथ बढ़ती भागीदारी शामिल हैं। पिछले साल भारत ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।
जयशंकर ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि भारत-अमेरिका संबंध बेहतर दिशा में बढ़ेंगे, लेकिन हमें सामने मौजूद मुद्दों को ध्यान में रखना होगा।"