भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध: नई वैश्विक व्यवस्था की ओर कदम
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कैनबरा में भारत की बढ़ती शक्ति और अर्थव्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इस लेख में, हम देखेंगे कि कैसे दोनों देशों के बीच दोस्ती केवल क्रिकेट और करी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और समृद्धि का एक अटूट संगम बन चुकी है। साथ ही, भारत की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की योजना और ऑस्ट्रेलिया के लिथियम भंडार की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी।
May 28, 2026, 19:45 IST
भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती दोस्ती
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कैनबरा की संसद में भाषण देना शुरू किया, तो उन्होंने केवल दो देशों की बात नहीं की, बल्कि एक नई वैश्विक व्यवस्था का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। यह केवल कूटनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह उस ड्रैगन की हार की कहानी है जिसने प्रशांत महासागर को अपनी जागीर समझा था। यह भारत की शक्ति का प्रतीक है, जो अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के कगार पर है। अल्बनीज का संबोधन वास्तव में भारत के लिए एक प्रशस्ति पत्र था।
भारत की जनसंख्या और आर्थिक संभावनाएं
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, लेकिन यह जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला इंजन है। अल्बनीज ने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की मित्रता अब केवल क्रिकेट और करी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और समृद्धि का एक अटूट संगम बन चुकी है। जब एक देश दूसरे की प्रगति को अपने लिए अवसर मानता है, तो यह रणनीतिक भरोसे का संकेत है।
हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका
ऑस्ट्रेलिया ने अब यह मान लिया है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में बिना भारत के कोई भी गतिविधि नहीं हो सकती। इस कहानी का एक दिलचस्प पहलू एंथनी अल्बनीज का भारत से व्यक्तिगत संबंध है। 1991 में जब भारत आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, तब एक विदेशी युवक भारत की गलियों में घूम रहा था। आज वह युवक ऑस्ट्रेलिया का प्रधानमंत्री है। उन्होंने उस भारत को देखा था जिसे दुनिया गरीबों का देश मानती थी। अब जब वे मोदी का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं, तो वे एक डिजिटल सुपर पावर और वैश्विक निर्माण केंद्र को देख रहे हैं। यही कारण है कि अल्बनीज और मोदी की केमिस्ट्री अन्य वैश्विक नेताओं से कहीं अधिक प्रामाणिक लगती है।
चीन के विस्तारवाद के खिलाफ एकजुटता
बीजिंग की दीवारों के पीछे आज सन्नाटा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर चीन के विस्तारवाद के खिलाफ एक ठोस कदम उठाने की योजना बनाई है। हाल ही में दिल्ली में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक ने एक ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार किया है जिसने ड्रैगन की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत के एस जयशंकर और ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग ने मिलकर समुद्री निगरानी और ईंधन सुरक्षा का एक जाल बुना है, जिसमें अब चीन का बचना मुश्किल है। अब समुद्र में किसी एक की दादागिरी नहीं चलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का राज होगा।
भारत की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की योजना
दोस्ती अपनी जगह है, लेकिन व्यापार ही रिश्तों की असली नींव है। भारत को 2030 तक अपनी सड़कों पर करोड़ों इलेक्ट्रिक गाड़ियां लानी हैं और इसके लिए लिथियम की आवश्यकता है, जिसे सफेद सोना कहा जाता है।
ऑस्ट्रेलिया का लिथियम भंडार
दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार ऑस्ट्रेलिया के पास है। 2022 का आर्थिक समझौता (ईसीटीए) अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है, जहां ऑस्ट्रेलिया का कच्चा माल और भारत की तकनीक मिलकर नई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाने जा रहे हैं। यह चीन की आर्थिक बादशाहत पर भारत और ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा हमला है।
भारतीय समुदाय की भूमिका
ऑस्ट्रेलिया की आत्मा अब भारतीय रंग में रंग चुकी है। लगभग 10 लाख भारतीय मूल के लोग वहां की अर्थव्यवस्था के स्तंभ हैं। सिडनी के हैरिस पार्क का नाम बदलकर लिटिल इंडिया करना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह उस ताकत की पहचान है जो भारत को ऑस्ट्रेलिया की घरेलू राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका देती है। अल्बनीज ने संसद में वादा किया कि वे किसी भी भारत विरोधी या विभाजनकारी तत्व को ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पनपने नहीं देंगे। यह पीएम मोदी की सॉफ्ट पावर की महाजीत है।