भारत और अमेरिका के बीच नई कूटनीतिक हलचल: मोदी-ट्रंप की मुलाकात की उम्मीदें बढ़ीं
नई दिल्ली में कूटनीतिक गतिविधियों का उभार
नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिविधियों में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। दोनों देशों के नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस संबंध में सकारात्मक संकेत दिए हैं। पिछले एक साल में कूटनीतिक अंतराल और व्यापारिक चुनौतियों के बाद, अब दोनों देशों के रिश्ते एक नई दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं।
मुलाकात की संभावनाएं
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने समिट के दौरान स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं की यह महत्वपूर्ण मुलाकात जल्द ही होने वाली है। हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित समय का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने विश्लेषकों को स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी। गोर के अनुसार, सही समय आने पर यह ऐतिहासिक बैठक अवश्य होगी। उल्लेखनीय है कि मोदी और ट्रंप की आखिरी मुलाकात लगभग एक साल पहले वॉशिंगटन डीसी में हुई थी, और तब से वैश्विक परिदृश्य में काफी बदलाव आ चुका है।
भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव
हाल के समय में भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में व्यापारिक मोर्चे पर कुछ तनाव देखा गया था, जिसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50 फीसदी का भारी टैरिफ था। हालांकि, हाल ही में संपन्न एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते ने इस तनाव को काफी हद तक कम कर दिया है। अब यह टैरिफ घटकर 18 फीसदी रह गया है, जिससे भविष्य में द्विपक्षीय व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।
पैक्स सिलिका: एक नया रणनीतिक गठबंधन
भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाले महत्वपूर्ण रणनीतिक गठबंधन 'पैक्स सिलिका' का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सर्जियो गोर ने इसे केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बड़ा रणनीतिक निर्णय बताया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और खनिज प्रसंस्करण कौशल इस नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी योग्यताएं प्रदान करती हैं।
AI तकनीक का साझा करना
अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि पैक्स सिलिका ढांचे के तहत अमेरिका अब भारत के साथ अपनी विश्वसनीय एआई प्रौद्योगिकियों को साझा करने की दिशा में तेजी से बढ़ सकता है। इंडिया एआई समिट के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में गोर ने भारतीय इंजीनियरिंग कौशल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा का एक विशाल भंडार है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को चुनौती दे सकता है। अमेरिका अब खनिज प्रसंस्करण में भी भारत के साथ सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।
वैश्विक एकजुटता का महत्व
अमेरिकी उप विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने भारत के इस गठबंधन में शामिल होने के साहसिक निर्णय की सराहना की है। उन्होंने पैक्स सिलिका को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनुचित दबाव और आर्थिक ब्लैकमेलिंग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। इसे चीन के बढ़ते प्रभाव और उसकी नीतियों के प्रति एक स्पष्ट कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। हेलबर्ग ने चेतावनी दी कि कई सहयोगी देश अपनी संप्रभुता और समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।