भारत और अमेरिका के रिश्तों में दरार: ट्रंप और मोदी की कहानी
भारत और अमेरिका के रिश्तों में गिरावट
एक समय था जब पीएम मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच की दोस्ती को मीडिया ने ब्रोमांस का नाम दिया था। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब वे भारत आए, तो भारत ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं, जब पीएम मोदी अमेरिका गए, तो उनके स्वागत के लिए 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि दोनों देशों के रिश्ते अब सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं?
संबंधों में गिरावट की शुरुआत
पहले कार्यकाल में ही शुरू हुई समस्याएं
ट्रंप के पहले कार्यकाल के अंत में ही दोनों नेताओं के बीच संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई थी। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में संबंधों को सुधारने के प्रयास किए गए, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हो सके। हालांकि, भारत या अमेरिका की ओर से कभी भी इन संबंधों के कमजोर होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
दोनों नेताओं के बीच दरार के कारण
कश्मीर मुद्दे पर विवाद
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, 22 जुलाई 2019 को, उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की यात्रा के दौरान कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान सहमत हों, तो वह कश्मीर मुद्दे में मध्यस्थता करने को तैयार हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मोदी ने उनसे मध्यस्थता की मांग की थी, जो नई दिल्ली के लिए चौंकाने वाला था। भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और वह किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा।
अधिक तनाव के कारण
ट्रंप के इस दावे से भारत नाराज हुआ, और ट्रंप भी हैरान थे कि उनकी मध्यस्थता की पेशकश को कैसे अस्वीकार किया जा सकता है। हालांकि, कोरोना लॉकडाउन से पहले ट्रंप की भारत में 'नमस्ते' रैली ने स्थिति को कुछ हद तक सामान्य कर दिया।
इसके बाद, सितंबर 2024 में मोदी अमेरिका गए, जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा और क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान ट्रंप ने मिशिगन में अपने चुनाव प्रचार के दौरान मोदी से मुलाकात की घोषणा की, लेकिन भारत ने इसे रद्द कर दिया, जिससे ट्रंप नाराज हो गए।
टैरिफ और व्यापार विवाद
जब ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव के बाद पीएम मोदी पहले विदेशी नेता के रूप में उन्हें बधाई देने व्हाइट हाउस पहुंचे, तो ऐसा लगा कि दोनों के बीच की कड़वाहट खत्म हो गई है। लेकिन इस बार ट्रंप टैरिफ के मुद्दे पर गुस्से में थे और उन्होंने भारत को 'टैरिफ किंग' की उपाधि दी।
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया युद्ध ने भी संबंधों को और खराब किया। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने सीजफायर कराया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने बार-बार इस दावे को दोहराया, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई।
अंतिम कारण
जी-7 सम्मेलन का निमंत्रण अस्वीकार
ट्रंप और मोदी के रिश्तों में खटास की एक और वजह तब सामने आई जब पीएम मोदी ने जी-7 सम्मेलन से लौटते समय ट्रंप के व्हाइट हाउस में रुकने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। उसी दिन ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख को आमंत्रित किया था। इस समय भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही थी, लेकिन भारत के रूस से तेल और हथियार खरीदने के कारण ट्रंप नाराज हो गए।
इन सभी मुद्दों के कारण ट्रंप आज भी भारत से नाराज हैं, और निकट भविष्य में दोनों नेताओं के बीच संबंधों में सुधार के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। हालांकि, यदि व्यापार समझौते पर बातचीत सफल होती है, तो संभव है कि दोनों नेताओं के बीच संबंधों में सुधार हो।