भारत और इजराइल की विशेष रणनीतिक साझेदारी: एक नई शुरुआत
भारत और इजराइल की मित्रता का इतिहास
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा देश, जो आकार में भारत के एक जिले के बराबर है, कैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे विश्वसनीय साथी बन गया? आमतौर पर कहा जाता है कि देशों के बीच स्थायी दोस्ती नहीं होती, केवल स्वार्थ होता है। लेकिन 1999 में जब कारगिल की पहाड़ियों पर भारत को धोखा दिया गया, तब दुनिया की शक्तिशाली राष्ट्र हमें उपदेश दे रहे थे। इस समय एक ऐसा देश था जिसने बिना किसी शर्त के अपने हथियारों के दरवाजे भारत के लिए खोल दिए। आज वही देश हरियाणा के खेतों में हमारे किसानों को वह अद्भुत तकनीक दे रहा है, जो बंजर भूमि को उपजाऊ बना सकती है। कारगिल की चोटियों से लेकर मुनीमपुर के खेतों तक, भारत और इजराइल की मित्रता अब केवल एक समझौता नहीं रह गई है, बल्कि यह एक विशेष रणनीतिक साझेदारी बन चुकी है।
कारगिल विजय दिवस और इजराइल की भूमिका
जब भारत 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाता है, हम उन बहादुर सैनिकों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर टाइगर हिल को पुनः प्राप्त किया। लेकिन इस जीत के पीछे एक ऐसा चुपचाप सहयोगी था, जिसका नाम इतिहास में कम है, लेकिन सेना के दस्तावेजों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वह नाम है इजराइल। 1999 में, जब भारत पर परमाणु परीक्षण के बाद प्रतिबंध लगे थे, हमारे पास दुश्मन को सटीक निशाना बनाने की तकनीक नहीं थी। तब इजराइल ने भारत को लेजर गाइडेड बम और लाइटिंग पॉट्स प्रदान किए। 24 जून 1999 को टाइगर हिल पर जो हुआ, वह इसी दोस्ती का परिणाम था।
ड्रोन तकनीक का विकास
आज हम जिस ड्रोन युग में हैं, उसकी नींव कारगिल में रखी गई थी। इजराइल ने हमें सर्च और हेरोन ड्रोन देकर दुश्मन को देखने की क्षमता दी। अब इजराइली तकनीक भारत में ऑपरेशन सिंदूर और मेक इन इंडिया के तहत विकसित हो रही है। हम अब केवल खरीददार नहीं, बल्कि सह-निर्माता बन चुके हैं। 17 जून 2026 को हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में भारत और इजराइल के बीच 35वें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन हुआ। इजरायली राजदूत रूजार ने कहा कि 30 साल पहले हम तकनीक लाते थे, लेकिन आज यह केंद्र भारतीय कंपनियों द्वारा भारतीय सामान से बनाया गया है। यह असली आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।