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भारत और ओमान के बीच CEPA समझौता लागू, व्यापार में नई संभावनाएं

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आज से लागू हो गया है, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। इस समझौते से भारतीय कपड़ा, कृषि, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। ओमान का 28 अरब डॉलर का आयात बाजार अब भारतीय कंपनियों के लिए खुल गया है, जिससे उन्हें सस्ती शुल्क दरों का लाभ मिलेगा। जानें CEPA और पारंपरिक FTA में क्या अंतर है।
 

भारत की नई व्यापारिक उपलब्धि

नई दिल्ली: भारत ने अपनी वैश्विक व्यापार नीतियों और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता' (CEPA) आज, 1 जून 2026 से देशभर में लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।


व्यापार के नए द्वार

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस ऐतिहासिक अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए ओमान के बाजार में प्रवेश के द्वार खोल देगा। इससे भारतीय कपड़ा, कृषि, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल और रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है।


द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि

11 अरब डॉलर का व्यापार

भारत और ओमान के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। ओमान वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 10.61 अरब डॉलर था।


समझौते की प्रक्रिया

यह ऐतिहासिक समझौता 18 दिसंबर 2025 को ओमान की राजधानी मस्कट में हस्ताक्षरित हुआ था। इसके बाद, दोनों देशों की आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे आज से प्रभावी किया गया है। ओमान का आधुनिक बंदरगाह ढांचा भारत के लिए खाड़ी सहयोग परिषद के अन्य समृद्ध बाजारों तक पहुंचने का एक रणनीतिक गेटवे है।


भारतीय कंपनियों को मिलेगा लाभ

28 अरब डॉलर का आयात बाजार

ओमान का कुल सालाना आयात बाजार 28 अरब डॉलर से अधिक है। CEPA लागू होने के बाद, भारतीय कंपनियों को इस विशाल बाजार में सस्ती शुल्क दरों का सीधा लाभ मिलेगा। इस समझौते का लाभ इंजीनियरिंग सामान, भारी मशीनरी, दवाइयां, प्रोसेस्ड फूड, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और रबर उत्पादों को मिलेगा।


समझौते का तात्कालिक प्रभाव

समझौते के पहले दिन ही इसका प्रभाव दिखने लगा है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के बंदरगाहों से कृषि उत्पादों और महंगे रत्नों की खेपें विशेष तरजीही शुल्क दरों के तहत ओमान के लिए रवाना की गई हैं। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत में कमी आएगी और वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।


CEPA और पारंपरिक FTA में अंतर

कई लोगों के मन में यह सवाल है कि CEPA पारंपरिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से कैसे भिन्न है। तकनीकी और व्यावहारिक रूप से, CEPA किसी भी सामान्य FTA की तुलना में अधिक व्यापक और गहरा है। पारंपरिक FTA मुख्य रूप से वस्तुओं के आयात-निर्यात शुल्क को कम करने पर केंद्रित होता है, जबकि CEPA का दायरा वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवा क्षेत्र, बड़े निवेश और पेशेवरों की आवाजाही को भी शामिल करता है।