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भारत और जापान के बीच UNICORN परियोजना: रक्षा सहयोग में नया अध्याय

भारत और जापान के बीच UNICORN परियोजना एक महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग है, जो दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे रहा है। यह पहली बार है जब दोनों देश मिलकर एक उन्नत रक्षा तकनीक का विकास करेंगे, जिससे भारतीय नौसेना की संचार क्षमता और सुरक्षा में सुधार होगा। इस परियोजना के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जापानी साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा, जो स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। जानें इस ऐतिहासिक समझौते के पीछे की कहानी और इसके संभावित लाभ।
 

भारत-जापान रक्षा सहयोग की नई दिशा


भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग में लगातार प्रगति हो रही है। इस दिशा में UNICORN परियोजना को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहली बार है जब भारत और जापान मिलकर एक उन्नत रक्षा तकनीक का विकास और निर्माण करेंगे। इस तकनीक का उपयोग भारतीय नौसेना के भविष्य के युद्धपोतों में किया जाएगा, जिससे उनकी संचार क्षमता, सुरक्षा और दुश्मन की नजर से बचने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।


UNICORN तकनीक की विशेषताएँ

UNICORN, जिसका पूरा नाम यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना है, एक अत्याधुनिक संचार प्रणाली है, जिसे युद्धपोतों के ऊपरी हिस्से पर स्थापित किया जाता है। सामान्यतः नौसैनिक जहाजों में विभिन्न एंटीना होते हैं, लेकिन इस तकनीक में सभी संचार उपकरण एक ही संरक्षित ढांचे में समाहित होते हैं। इससे जहाज का बाहरी स्वरूप अधिक सुव्यवस्थित होता है और उसकी रडार पहचान कम हो जाती है। जापान पहले से ही इस तकनीक का उपयोग अपने आधुनिक मोगामी श्रेणी के युद्धपोतों में कर रहा है।


भारतीय नौसेना को लाभ

आधुनिक समुद्री युद्ध में केवल हथियारों की ताकत ही नहीं, बल्कि दुश्मन की नजर से बचना भी महत्वपूर्ण है। UNICORN प्रणाली भारतीय युद्धपोतों की रडार पहचान को कम करेगी, जिससे उन्हें ट्रैक करना कठिन होगा। इसके अलावा, कई संचार और डेटा लिंक सिस्टम एक ही प्लेटफॉर्म पर कार्य करेंगे, जिससे इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप कम होगा और संचार अधिक प्रभावी बनेगा। खुले एंटीना की कमी से रखरखाव आसान होगा और युद्ध जैसी परिस्थितियों में जहाज की संचालन क्षमता और सुरक्षा में सुधार होगा।


संयुक्त विकास और निर्माण की प्रक्रिया

इस परियोजना की शुरुआत नवंबर 2024 में टोक्यो में भारतीय दूतावास में हस्ताक्षरित कार्यान्वयन समझौते से हुई थी। इसके तहत भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जापानी साझेदारों के साथ मिलकर इस तकनीक का विकास और उत्पादन करेगी। यह मॉडल पारंपरिक खरीद-बिक्री व्यवस्था से भिन्न है, क्योंकि इसमें दोनों देश मिलकर उन्नत रक्षा तकनीक विकसित करेंगे। इससे भारत को आधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त होगी और भविष्य में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई गति मिलेगी।


ऐतिहासिक समझौते का महत्व

UNICORN परियोजना भारत-जापान रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह दोनों देशों की पहली रक्षा सह-विकास और सह-उत्पादन परियोजना है। 2015 के रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के बाद, यह जापान द्वारा भारत को उन्नत रक्षा तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हाल ही में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।