भारत और तालिबान के रिश्ते में बदलाव: विक्ट्री डे रिसेप्शन का आयोजन
तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सत्ता के पांच साल पूरे कर लिए हैं, और इस दौरान भारत के साथ उनके संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। पहली बार, तालिबान दिल्ली में विक्ट्री डे रिसेप्शन का आयोजन कर रहा है, जिसमें भारतीय अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। यह कार्यक्रम तालिबान के काबुल में सत्ता में लौटने के बाद का पहला सार्वजनिक आयोजन है, जो दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच संबंध कैसे विकसित हो रहे हैं। भारत ने तालिबान के साथ संवाद का रास्ता खुला रखा है, जबकि तालिबान ने भी भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।
Aug 14, 2026, 20:02 IST
तालिबान का पांचवां वर्ष और भारत के साथ संबंध
तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सत्ता को 5 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान भारत और तालिबान के बीच संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। पहले जहां भारत तालिबान से दूरी बनाए रखता था, वहीं अब तालिबान के मंत्री नियमित रूप से भारत का दौरा कर रहे हैं। खास बात यह है कि तालिबान पहली बार दिल्ली में अपना विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित करने जा रहा है। तालिबान के चार्ज डी अफेयर्स मुफ्ती नूर अहमद नूर 17 अगस्त को नई दिल्ली में एक सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन का आयोजन करेंगे। इस कार्यक्रम में राजनायकों, अफगान डायस्पोरा के प्रमुख व्यक्तियों और मीडिया के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार के अधिकारी भी इस रिसेप्शन में भाग ले सकते हैं, हालांकि किस अधिकारी की उपस्थिति होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह कार्यक्रम तालिबान के 2021 में काबुल में सत्ता में लौटने के बाद भारत में उनका पहला सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन है, जो यह दर्शाता है कि भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते किस दिशा में बढ़ रहे हैं।
विक्ट्री डे का महत्व
तालिबान हर साल 15 अगस्त को अपना विक्ट्री डे मनाता है। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के दौरान तालिबान ने काबुल पर फिर से नियंत्रण स्थापित किया था, जिसे वह अपनी जीत मानता है। इस वर्षगांठ को विक्ट्री डे के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, इस साल दिल्ली में इसका सार्वजनिक रिसेप्शन 17 अगस्त को हो रहा है, जो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने अभी तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत तालिबान से संवाद नहीं करेगा। मान्यता न देने के बावजूद, भारत और तालिबान के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं, और यही कारण है कि तालिबान इस तरह का कार्यक्रम भारत में आयोजित कर रहा है।
भारत-तालिबान संवाद
भारत ने हमेशा तालिबान के साथ संवाद का रास्ता खुला रखा है। तालिबान के सत्ता में आने से पहले और बाद में भी, भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। तालिबान ने भी इस बात को समझा है। इसके अलावा, भारत चाहता है कि अफगानिस्तान में स्थिरता बनी रहे और वहां उसकी आर्थिक और नैतिक उपस्थिति भी कायम रहे।