भारत और फ्रांस के बीच उच्च स्तरीय वार्ता: रक्षा से लेकर डिजिटल प्रौद्योगिकी तक
भारत और फ्रांस ने पेरिस में एक उच्च स्तरीय वार्ता का आयोजन किया, जिसमें रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की गई। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश सचिव और फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव ने भाग लिया। वार्ता के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों, जैसे जलवायु परिवर्तन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में घटनाक्रमों पर भी विचार किया गया। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदु और दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी के बारे में।
Apr 14, 2026, 12:22 IST
भारत-फ्रांस वार्ता का उद्देश्य
भारत और फ्रांस ने पेरिस में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया, जिसमें रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और डिजिटल तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपनी बढ़ती साझेदारी का मूल्यांकन किया गया। यह वार्ता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में हुई, जो कि चर्चा के एजेंडे में शामिल था। इस बैठक में भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श ढांचे के तहत विदेश सचिव विक्रम मिसरी और फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स ने भाग लिया। दोनों पक्षों ने सहयोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और संबंधों को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
मिसरी की फ्रांस यात्रा
मिसरी ने अपनी यात्रा के दौरान फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन से भी मुलाकात की। यह यात्रा अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा के बाद हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की, विशेष रूप से जब से उन्हें विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है। इस समीक्षा में इस वर्ष की शुरुआत में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की भारत यात्रा के परिणामों पर भी चर्चा की गई। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मिसरी और ब्रिएन्स की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं में हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई।
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दे चर्चा का प्रमुख विषय रहे
बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिसमें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य पर सहयोग शामिल था। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर भी विचार किया गया। दोनों पक्षों ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, त्रिपक्षीय संवाद, तीसरे देशों में संयुक्त विकास परियोजनाओं और पश्चिम एशिया तथा यूक्रेन में हो रहे घटनाक्रमों जैसे वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।