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भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक समझौता: अमेरिका की धमकियों का जवाब

भारत ने ब्रिटेन के साथ एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं, जो अमेरिका की धमकियों का प्रभाव कम करेगा। इस समझौते के तहत, ब्रिटेन ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है, जिससे भारतीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। जानें कैसे यह समझौता भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और अमेरिका की नीतियों को चुनौती देगा।
 

अमेरिका की आर्थिक रणनीतियाँ और भारत का मास्टर स्ट्रोक

वाशिंगटन में भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने की योजनाएँ बनाई जा रही थीं। अमेरिका ने पहले 25% का टैरिफ लगाया, फिर रूस से तेल खरीदने पर 25% की पेनल्टी लगाई। अब, वह ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500% का टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है। इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा कदम उठाया कि अमेरिका हिल गया। ब्रिटेन, जो कभी भारत पर राज करता था, अब भारत का समर्थन कर रहा है, जिससे ट्रंप की टैरिफ नीति पूरी तरह से विफल हो गई।


डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ और भारत का जवाब

जब डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में लौटे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिकता 'अमेरिका पहले' है। भारत को सीधा संदेश मिला कि रूस से तेल खरीदने पर दंडित किया जाएगा। डिजिटल टैक्स हटाने में विफलता पर भी सजा का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका को विश्वास था कि भारत का आईटी सेक्टर प्रभावित होगा, लेकिन वे यह भूल गए कि यह 2026 का भारत है।


भारत का मास्टर स्ट्रोक: भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

जब अमेरिका धमकियाँ दे रहा था, तब भारत ने एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक तैयार किया। ब्रिटेन, अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत के पास आया। भारत ने इस मौके का लाभ उठाते हुए भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 21वीं सदी का सबसे बड़ा जियोइकोनॉमिक कदम है। इस एग्रीमेंट के तहत, ब्रिटेन ने भारत के 99% उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। इसका मतलब है कि भारतीय कपड़े, जूते, दवाइयाँ, ऑटो पार्ट्स और मशीनरी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।