भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंधों में ऐतिहासिक वृद्धि
भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंधों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जो 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह साझेदारी न केवल आर्थिक लेन-देन का प्रतीक है, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच विश्वास का भी संकेत है। 2032 तक 200 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह व्यापारिक संबंध कई यूरोपीय देशों की जीडीपी से भी बड़े हो सकते हैं। इसके साथ ही, यूएई का भारत में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य में और भी अवसर प्रदान करेगा।
Sep 2, 2026, 20:13 IST
भारत और यूएई की साझेदारी का महत्व
भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, और यूएई, जो तकनीक और व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है, जब मिलते हैं, तो वे भविष्य की दिशा तय करते हैं। इन दोनों देशों के बीच की मित्रता अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है, जिससे विकसित देशों के लिए यह एक मिसाल बन गई है। वर्तमान में, द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच विश्वास का प्रतीक है। यह भारत की एक्ट, वेस्ट नीति और यूएई के विज़न 2031 का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। इस सफलता की कहानी की शुरुआत 2022 में हुई, जब भारत और यूएई ने सीईपीए पर हस्ताक्षर किए, जो यूएई द्वारा किसी अन्य देश के साथ किया गया पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता था।
व्यापारिक आंकड़े और भविष्य की योजनाएं
2022 में, यूएई ने भारत को अपने व्यापारिक साझेदार के रूप में चुना, जो भारत की वैश्विक स्थिति को दर्शाता है। उस समय व्यापार लगभग 60 बिलियन डॉलर था, लेकिन 2026 के अंत तक यह आंकड़ा 100 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसके परिणामस्वरूप, भारत के 80% सामानों पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया गया है, और भारतीय ज्वेलरी, कपड़े, और इंजीनियरिंग सामानों के लिए यूएई का बाजार पूरी तरह से खुल गया है। अगले 10 वर्षों में अधिकांश टैरिफ हटने की संभावना है, जो व्यापार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 2032 तक 200 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत और यूएई की व्यापारिक अर्थव्यवस्था कई यूरोपीय देशों की कुल जीडीपी से भी बड़ी हो जाएगी।
निवेश में वृद्धि
दोस्ती का यह रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश में भी स्पष्ट है। यूएई अब भारत में निवेश करने वाला सातवां सबसे बड़ा देश बन चुका है। अप्रैल 2000 से 2026 तक, यूएई ने भारत में 25.59 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है, जिसमें पिछले 4-5 वर्षों में तेजी आई है। इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने अंबानी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 बिलियन डॉलर का एल्यूमिनियम प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो भारत की औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा। इसके अलावा, अबू धाबी की मुबादला कंपनी ने Reliance Industries के साथ डिजिटल प्लेटफार्म में भारी निवेश किया है। डीपी वर्ल्ड ने पहले ही भारत के बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स में 3 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और अब 5 बिलियन डॉलर और निवेश करने का इरादा रखती है।