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भारत और यूके के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर महत्वपूर्ण समझौता

यूके की विदेश सचिव येविड कूपर के भारत दौरे के दौरान, भारत और यूके ने क्रिटिकल मिनरल्स पर एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि चीन जैसी शक्तियों को चुनौती देने में भी सहायक होगा। इस लेख में, हम समझौते के प्रमुख बिंदुओं और इसके महत्व पर चर्चा करेंगे, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी विकास के लिए आवश्यक खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाए गए कदम शामिल हैं।
 

भारत में यूके की फॉरेन सेक्रेटरी का दौरा

यूके की विदेश सचिव येविड कूपर हाल ही में भारत के दौरे पर थीं, जहां भारत और यूएई के बीच सहयोग के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। इस दौरे के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें सबसे प्रमुख समझौता क्रिटिकल मिनरल्स के संबंध में है। ये खनिज स्मार्टफोन्स से लेकर सैन्य मिसाइलों तक में उपयोग होते हैं। भारत और ब्रिटेन ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो चीन जैसे देशों को चुनौती दे सकता है। 4 जून 2026 को नई दिल्ली में भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जरवेटरी (जीएससीओ) का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर उपस्थित थीं।


समझौतों का उद्देश्य और महत्व

ब्रिटेन की विदेश सचिव का यह दौरा आधिकारिक था, जिसमें भारत और यूके के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हुई। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इंडिया-यूके विजन 2035 की पहली सालाना समीक्षा करना था, जो जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान स्थापित किया गया था। कूपर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की और प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की। इस दौरान विकास, तकनीक, नवाचार, रक्षा सुरक्षा, जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा जैसे पांच मुख्य स्तंभों पर चर्चा की गई।


क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व

क्रिटिकल मिनरल्स वे आवश्यक खनिज हैं जो स्वच्छ ऊर्जा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनकी मांग इलेक्ट्रिक वाहनों, उन्नत निर्माण और रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही है। लिथियम, कोबाल्ट, और ग्रेफाइट जैसे खनिजों को क्रिटिकल मिनरल्स के रूप में जाना जाता है, जो भविष्य की तकनीक के लिए आवश्यक हैं। भारत और ब्रिटेन का यह ऑब्जरवेटरी स्थापित करने का उद्देश्य इन खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना है, ताकि किसी भी देश की मनमानी को रोका जा सके। इस प्रकार, भारत और यूके के बीच समझौता इन खनिजों की सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, दोनों देशों के रिश्ते अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी और 2030 रोड मैप पर आधारित हैं।