भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता: एक नई शुरुआत
भारत की नई कूटनीति
एक समय था जब विकासशील देशों को पश्चिमी देशों की शर्तों पर समझौते करने पड़ते थे। लेकिन अब 21वीं सदी का भारत अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा है। अपनी शक्ति के आधार पर, यह वैश्विक एजेंडे को निर्धारित करता है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के साथ समानता की मेज पर बैठता है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो यूरोप ऊर्जा संकट, युद्ध और धीमी आर्थिक वृद्धि से जूझ रहा है। इसके विपरीत, भारत 7% से अधिक की जीडीपी विकास दर के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन बना हुआ है। इस स्थिति का परिणाम यह है कि 27 विकसित देशों का समूह, यानी यूरोपीय संघ, भारत के साथ एक बड़ा व्यापारिक समझौता करने के लिए उत्सुक है।
प्रधानमंत्री मोदी की ब्रुसेल्स यात्रा
कनाडा के मॉन्ट्रियल से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक खबर आई है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 दिसंबर को ब्रुसेल्स पहुंचेंगे। उनका उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है। यह केवल एक कागजी दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह 2 अरब से अधिक लोगों के लिए एक साझा बाजार का निर्माण करेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के 25% हिस्से को प्रभावित करेगा।
व्यापारिक आंकड़े और महत्व
इस घटनाक्रम की शुरुआत कनाडा के मॉन्ट्रियल में हुई, जहां एंटोनियो कोस्टा ने वैश्विक व्यापार और यूरोप के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में ब्रुसेल्स में व्यापार डील पर हस्ताक्षर करने आ रहे हैं। यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि 17 दिसंबर को यूरोपीय संघ के राष्ट्रध्यक्षों की वार्षिक बैठक शुरू हो रही है। नई दिल्ली में भी इस समझौते की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों पक्षों ने तकनीकी बातचीत पूरी कर ली है और समझौते पर हस्ताक्षर के 4 से 5 महीनों के भीतर इसे लागू किया जाएगा।
भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोप के बीच गुड्स का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 136.54 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। भारत का निर्यात 6.4 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 75.85 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 5.1 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 60.68 अरब डॉलर था। इस प्रकार, भारत को व्यापार में शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।
सेवाओं का व्यापार और भविष्य
2024 में दोनों पक्षों के बीच सेवाओं का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 83.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का 25% हिस्सा बनाते हैं। जब ये दोनों बाजार न्यूनतम टैरिफ पर एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तो इससे अन्य देशों पर प्रभाव पड़ेगा। भारत ने इस समझौते में अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली, 99% भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार खुला। दूसरी, कुशल पेशेवरों के लिए सीमलेस मोबिलिटी फ्रेमवर्क।