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भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस: वंदे मातरम का ऐतिहासिक समावेश

भारत इस वर्ष अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर एक महत्वपूर्ण बदलाव के साथ समारोह मनाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले पर तिरंगा फहराने के साथ ही 'वंदे मातरम' का गायन भी करेंगे, जो अब तक समारोह का हिस्सा नहीं रहा। जानें इस बदलाव के पीछे का इतिहास और इसके महत्व के बारे में।
 

स्वतंत्रता दिवस का विशेष समारोह


भारत इस वर्ष अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस को एक विशेष बदलाव के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है। 15 अगस्त को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वीं बार दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराएंगे और देशवासियों को संबोधित करेंगे। इस बार समारोह में एक नई परंपरा जुड़ने जा रही है, जो पहले कभी नहीं देखी गई।


वंदे मातरम की प्रस्तुति

प्रधानमंत्री के भाषण से पहले, लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का गायन होगा। इसके बाद, राष्ट्रगान 'जन गण मन' भी अपनी निर्धारित भूमिका में प्रस्तुत किया जाएगा।


वंदे मातरम का ऐतिहासिक संदर्भ

अब तक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के समारोह में राष्ट्रगान को प्राथमिकता दी जाती थी। इसके पीछे केवल प्रोटोकॉल ही नहीं, बल्कि आजादी से पहले का एक विवाद भी था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' के पहले दो छंद मातृभूमि की स्तुति पर आधारित हैं, जबकि आगे के छंदों में देवी दुर्गा और हिंदू प्रतीकों का उल्लेख है। इस पर मुस्लिम लीग और अन्य पक्षों ने आपत्ति जताई थी।


1937 का महत्वपूर्ण निर्णय

देश की विविधता और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, 1937 में वंदे मातरम के पहले दो छंदों को सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग करने का निर्णय लिया गया। महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह भी इस निर्णय में महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्वतंत्रता के बाद, 1950 में संविधान सभा ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' के पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।


2026 में बदलाव

हाल ही में, जुलाई 2026 में संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया। इसके तहत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण दिया गया है। 1971 के Prevention of Insults to National Honour Act में संशोधन के माध्यम से 'वंदे मातरम' को भी शामिल किया गया है। इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना अब अपमान की श्रेणी में आएगा और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बदलाव के बाद, 15 अगस्त 2026 का समारोह ऐतिहासिक होगा, जहां 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' दोनों एक साथ गूंजेंगे।