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भारत का आत्मविश्वास: अमेरिका की टेरिफ धमकी का ठोस जवाब

भारत ने अमेरिका द्वारा 500% टेरिफ लगाने की धमकी का आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया है। आरबीआई की पूर्व सदस्य आशिमा गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत को इस स्थिति से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत की आर्थिक वृद्धि और नवाचार अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक वृद्धि में भारत की भूमिका और घरेलू मांग की मजबूती पर भी प्रकाश डाला। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

भारत का ठंडा और आत्मविश्वास से भरा जवाब

जब अमेरिका ने 500% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, तो भारत में न तो घबराहट थी और न ही हड़बड़ी। इसके बजाय, एक ठंडा और आत्मविश्वास से भरा उत्तर आया। पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। कभी यह कहा जाता है कि डील अंतिम चरण में है, तो कभी यह कि बस अंतिम बातचीत बाकी है। लेकिन सच्चाई यह है कि इस व्यापार समझौते पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से टैरिफ की धमकी दी, इस बार 10 या 20% नहीं, बल्कि सीधे 500% की चेतावनी दी। ट्रंप के इस बयान के बाद बाजारों में हलचल मच गई, नीति निर्माताओं के बीच चर्चाएं तेज हो गईं और मीडिया में चिंता का माहौल बन गया। सवाल उठने लगे कि क्या इससे भारत की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी?


आशिमा गोयल का स्पष्ट बयान

लेकिन तभी एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट आवाज सामने आई। आरबीआई की पूर्व सदस्य और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री आशिमा गोयल ने इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह गलत है मान लेना कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता न होने पर भारत की अर्थव्यवस्था रुक जाएगी। उनके अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि, मांग और नवाचार अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं। आशिमा गोयल ने यह भी बताया कि अमेरिका से बहुत अधिक डेटा और एफडीआई आता है, लेकिन यह भारत की आर्थिक स्थिति को नहीं रोक सकता।


ग्लोबल ग्रोथ में भारत की भूमिका

आशिमा गोयल ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया, जिसमें बताया गया कि आज वैश्विक वृद्धि का 50% से अधिक हिस्सा उभरते बाजारों से आता है। भारत, एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों से जो आज दुनिया की आधी से अधिक गति को निर्धारित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश यह मानता है कि दुनिया उसकी शर्तों पर चलेगी, तो अन्य देश अपने विकल्प खोज लेंगे। यदि दबाव डाला जाए, धमकी दी जाए और टैरिफ से डराया जाए, तो देश नए रास्ते अपनाने के लिए मजबूर हो जाएंगे, और भारत आज यही कर रहा है। भारत के पास एशिया में मजबूत व्यापार साझेदार हैं, अफ्रीका में बढ़ता बाजार है और दक्षिण अमेरिका में नए अवसर हैं।


भारत की मजबूत घरेलू मांग

इसके अलावा, भारत की घरेलू मांग मजबूत है। स्टार्टअप्स और नवाचार तेजी से बढ़ रहे हैं, और मैन्युफैक्चरिंग में भी वृद्धि हो रही है। इसका मतलब यह है कि भारत अब उस स्थिति में नहीं है जहां वह किसी एक देश की धमकी से अपनी नीतियों में बदलाव कर दे। यह कहना गलत होगा कि अमेरिका की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह कहना सही है कि अमेरिका अनिवार्य नहीं है। यही भारत का नया आत्मविश्वास है।