भारत का डीजल निर्यात: वैश्विक संकट के बीच नई ऊंचाइयों पर
भारत का डीजल निर्यात: एक नई उपलब्धि
आज दुनिया की निगाहें एक बार फिर भारत पर हैं, जिसका कारण समुद्र के रास्ते डीजल का निर्यात है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब डीजल की कमी के चलते संकट गहरा गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण डीजल की भारी कमी हो रही है। इस बीच, भारत ने इस संकट के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अक्टूबर में भारत का डीजल निर्यात 13 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वह समुद्र के रास्ते डीजल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत ने इस क्षेत्र में रूस जैसे बड़े निर्यातकों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को रिफाइनिंग सुपर पावर कहा था, और अब यह सुपर पावर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है।
रिलायंस इंडस्ट्री का योगदान
अक्टूबर में भारत द्वारा निर्यात किए गए डीजल का लगभग 78% हिस्सा रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी से आया है, जिसने अकेले 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल का निर्यात किया। सरकारी रिफाइनरियों ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे मार्जिन का लाभ उठाया है। मंगल रिफाइनरी का निर्यात सितंबर में 1000 बैरल से बढ़कर लगभग 38,000 बैरल प्रतिदिन हो गया, जबकि इंडियन ऑयल का निर्यात 464% बढ़कर लगभग 53,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
वैश्विक कारणों का प्रभाव
भारतीय डीजल की बढ़ती मांग के पीछे दो प्रमुख वैश्विक कारण हैं। पहला, रूस की रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले, जिसने उनके ईंधन निर्यात में कमी की है। दूसरा, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण सप्लाई चेन में रुकावट आई है। डीजल का उपयोग केवल वाहनों में नहीं होता, बल्कि यह ट्रकों, भारी मशीनरी और कृषि उपकरणों में भी आवश्यक है।
आर्थिक पहलू
जब यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में डीजल की कमी हुई, तो कीमतें बढ़ गईं। भारत की जामनगर रिफाइनरी, जो 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही है, ने इस अवसर का लाभ उठाया और डीजल की आपूर्ति शुरू की। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत कच्चे तेल का 88% से अधिक आयात करता है, और इसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं। भारत को क्रूड इंपोर्ट के लिए औसतन $123 प्रति बैरल चुकाना पड़ रहा है, जिससे वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल $90 अरब डॉलर तक पहुंच गया।