भारत का शेषनाग 150: पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती
भारत का नया हथियार: शेषनाग 150
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने के लिए शेषनाग 150 का विकास किया है। जब यह ड्रोन पाकिस्तान की सीमा के पास उड़ान भरता है, तो इस्लामाबाद और कराची में हलचल मच जाती है। यह एक अत्याधुनिक हथियार है, जो दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर कई घंटों तक मंडराने की क्षमता रखता है और फिर सटीक निशाना लगाकर अपने लक्ष्य को नष्ट कर देता है। इसकी रेंज पूरी पाकिस्तान को कवर करती है।
राजस्थान के पोखरण में इसके सफल परीक्षण के बाद, यह सवाल उठता है कि क्या शेषनाग 150 वास्तव में इतना खतरनाक है और क्या यह भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा?
शेषनाग 150 की विशेषताएँ
यह कोई साधारण ड्रोन नहीं है, बल्कि एक लोटरिंग म्यूशन है, जिसका उद्देश्य दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसना और सही समय पर हमला करना है। इसे बेंगलुरु के स्टार्टअप न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित किया गया है। इसके परीक्षण के दौरान, ड्रोन ने लगभग 720 किलोमीटर की दूरी तय की और 5 घंटे तक हवा में रहा। इसकी अधिकतम रेंज 1000 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह पाकिस्तान के बड़े शहरों तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि यह हमला नहीं, बल्कि एक डिट्रेस है, जिससे दुश्मन को यह पता चलता है कि भारत के पास ऐसी तकनीक है जो कहीं भी पहुंच सकती है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर ईरान के प्रसिद्ध ड्रोन शहीद 136 की तुलना शेषनाग 150 से की जा रही है, जिसने हाल के संघर्षों में दिखाया है कि सस्ते ड्रोन भी युद्ध का रुख बदल सकते हैं। लेकिन शेषनाग 150 भारतीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। इसकी ताकत और रेंज इसे एक प्रभावी हथियार बनाती है।
यह ड्रोन रडार सिस्टम, हथियार डिपो, कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला कर सकता है। यहां तक कि यदि दुश्मन जीपीएस को जाम कर दे, तो भी यह अपने ऑनबोर्ड सेंसर के माध्यम से मिशन को पूरा कर सकता है।