भारत की 16वीं जनगणना: ऐतिहासिक आंकड़े और डिजिटल पहल का आगाज
नई दिल्ली में जनगणना की तैयारियों का आगाज
नई दिल्ली: भारत की 16वीं जनगणना की तैयारियां अब वास्तविकता में बदलने लगी हैं। केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना के लिए 40 महत्वपूर्ण प्रश्नों की आधिकारिक सूची जारी की है। यह जनगणना कई दृष्टिकोण से ऐतिहासिक होने जा रही है। आजादी के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत आंकड़े एकत्रित करने की योजना बनाई गई है, साथ ही कोविड-19 के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए टीकाकरण से जुड़ी जानकारियां भी मांगी जाएंगी। यह राष्ट्रीय अभियान डिजिटल सुविधाओं से लैस होकर देश के विभिन्न हिस्सों में शुरू होने वाला है।
सामाजिक और डिजिटल साक्षरता का महत्व
रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना अधिकारियों को नागरिकों की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। प्रगणक हर परिवार से उनकी जाति, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की स्थिति, धर्म और मातृभाषा से संबंधित प्रश्न पूछेंगे।
इसके अलावा, नागरिकों की डिजिटल साक्षरता, बैंक खातों की संख्या, शैक्षणिक योग्यता, रोजगार के साधन और प्रवास के कारणों का विवरण भी एकत्र किया जाएगा।
दुर्गम क्षेत्रों से जनगणना की शुरुआत
भौगोलिक चुनौतियों और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, जनसंख्या गणना अभियान सबसे पहले देश के दुर्गम क्षेत्रों में शुरू होगा। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले और कठिन इलाकों में 1 से 30 सितंबर के बीच घर-घर जाकर गणना का कार्य किया जाएगा। इससे पहले, 17 से 31 अगस्त तक स्थानीय नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा। वहीं, देश के अन्य मैदानी और शहरी क्षेत्रों में जनगणना का यह चरण अगले साल फरवरी 2027 में आयोजित होगा।
आजादी के बाद की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना
यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास की स्थिति को दर्ज किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत जानकारी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वर्ष 2021 में वैश्विक महामारी के कारण स्थगित हुई यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद की आठवीं और देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है। मोबाइल ऐप और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आंकड़ों के संग्रहण में पारदर्शिता और गति आएगी, जिससे भविष्य की सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा। प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर कोविड प्रबंधन को समझने के लिए टीकाकरण स्थल की जानकारी भी इस सूची में शामिल की गई है।