भारत की आंतरिक सुरक्षा पर ईरान के तनाव का प्रभाव
ईरान के हालात का भारत पर असर
पश्चिम एशिया में अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों का प्रभाव भारत की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संभावित सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है.
गृह मंत्रालय की चेतावनी
गृह मंत्रालय ने एक पत्र के माध्यम से ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद भारत में संभावित हिंसा की चेतावनी दी है। इस पत्र में राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रहने और "ईरान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशकों" की पहचान करने के लिए कहा गया है, जो भड़काऊ भाषण दे सकते हैं.
कट्टरपंथी उपदेशकों की पहचान
इस संदेश में यह भी बताया गया है कि विदेशों में हो रहे घटनाक्रम का देश में असर पड़ सकता है, विशेषकर धार्मिक समारोहों में भड़काऊ बयानबाजी के माध्यम से. गृह मंत्रालय ने राज्यों से इन कट्टरपंथियों पर नज़र रखने और उनकी पहचान करने का आग्रह किया है.
भारत की अपील
भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, खासकर खाड़ी देशों में रहने वालों की.
प्रधानमंत्री मोदी की पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर बात की और क्षेत्र के हालात पर चर्चा की। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही.
CCS की बैठक
मोदी ने पश्चिम एशिया में बदलते हालात की समीक्षा के लिए कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें ईरान में हुए हवाई हमलों और खाड़ी देशों में हमलों के बारे में जानकारी दी गई.