भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अमेरिका की भूमिका
भारत की ऊर्जा विविधता की खोज
(योषिता सिंह) न्यूयार्क, 26 सितंबर - भारत, जो भारी ऊर्जा आवश्यकताओं का सामना कर रहा है, लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के उपायों की तलाश में है। इस संदर्भ में, अमेरिका इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को मंजूरी दी।
नए कानून के प्रभाव
इस नए कानून के तहत, ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, जिसमें चीन और भारत शामिल हैं। इस कानून ने उन देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी रखा है, जो रूसी तेल खरीदते हैं। जब भारत की प्रतिक्रिया और इस विधेयक के द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है।
भारत की ऊर्जा आवश्यकताएँ
अधिकारी ने कहा, "भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। उन्हें अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता है।" उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस के सदस्यों ने भारत की आलोचना की है, इसलिए भारत को इस पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक था।
अमेरिका का समर्थन
अधिकारी ने कहा, "हम अपने मित्र देशों, विशेषकर भारत जैसे देशों से इस प्रयास में सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अब एलपीजी का सबसे बड़ा और एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है और इसके लिए हाइड्रोकार्बन निर्यात को बढ़ाने की योजना बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से पहले ही भारत ऊर्जा विविधता की दिशा में प्रयासरत था, और अब इस प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है।