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भारत की तेल आपूर्ति पर अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव

भारत की तेल आपूर्ति पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। हाल के संघर्ष के कारण कच्चे तेल के भंडार में कमी आई है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से डीजल और पेट्रोल की बचत करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो रिफाइनरियों को अपनी प्रोसेसिंग में कटौती करनी पड़ सकती है। जानें भारत के तेल भंडार की स्थिति और वैश्विक बाजार पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

तेल आपूर्ति पर बढ़ता संकट

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनाव की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण भारत की तेल आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष के चलते भारत के कच्चे तेल के भंडार में लगभग 15% की कमी आई है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार, कच्चे तेल के आयात में कमी आने के बाद देश ने रिफाइनरी का काम सामान्य रूप से जारी रखा है, जिससे तेल भंडार में तेजी से गिरावट आई है.


प्रधानमंत्री की अपील

प्रधानमंत्री ने लोगों से की है तेल बचाने की अपील

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारतीय रिफाइनरियों को अपनी प्रोसेसिंग गतिविधियों में कटौती करनी पड़ सकती है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़ती तनाव ही एक कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से डीजल और पेट्रोल की बचत करने की अपील की थी.


लंबी रुकावट का प्रभाव

लंबी रुकावट से होगी भारी परेशानी

विश्लेषकों के अनुसार, पिछले ढाई महीनों में भारत का कच्चा तेल आयात लगभग 4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा है, जबकि ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने से पहले यह लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। वर्तमान में रिफाइनरी संचालक अपने भंडार का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज बंद रहता है, तो यह समाधान स्थायी नहीं हो सकता है.


भारत के तेल भंडार की स्थिति

देश के पास कितने दिनों का तेल?

इस बीच, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत के पास कितने दिनों का तेल भंडार बचा है। Kpler के अनुसार, भारत का कुल कच्चा तेल भंडार फरवरी में 107 मिलियन बैरल से घटकर अब लगभग 91 मिलियन बैरल रह गया है। देश की लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की खपत के आधार पर, यह भंडार लगभग 18 दिनों तक ही चल सकेगा.

हालांकि, भारत सरकार ने तेल की कमी की चिंताओं को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिसमें पाइपलाइनों में जमा तेल और समुद्र के रास्ते आ रही कच्चे तेल की खेप भी शामिल है.


वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

दुनिया भर के मार्केट पर बढ़ रहा है लोड

इस संघर्ष का वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ रहा है। खाड़ी देशों में तेल उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में कमी आ रही है। इराक और कुवैत जैसे देश होर्मुज पर निर्भरता के कारण तेल निर्यात में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर तेल की आपूर्ति जारी रख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि गर्मियों में वैश्विक मांग बढ़ने के कारण तेल की कीमतें अस्थिर हो सकती हैं.