भारत की नई रक्षा साझेदारी: विश्व स्तर पर आर्टिलरी सिस्टम का निर्माण
भारत की रक्षा क्षमता में नया अध्याय
भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं है, बल्कि वह उन हथियारों का निर्माण करने वाला देश बन गया है, जिन्हें वैश्विक सेनाएं उपयोग करेंगी। भविष्य में, भारत अपनी सेना के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के लिए भी अत्याधुनिक आर्टिलरी सिस्टम विकसित करने की योजना बना रहा है। हाल ही में, भारतीय रक्षा कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम लिमिटेड (केएसएसएल) और अमेरिका की प्रमुख सैन्य वाहन निर्माता कंपनी एएम जनरल ने एक महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की है। इस समझौते के तहत, दोनों कंपनियां मिलकर अगली पीढ़ी के माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम का विकास करेंगी, जिसका उपयोग दुनिया भर की सेनाएं करेंगी। यह समझौता पेरिस में आयोजित यूरोसेट्री डिफेंस एक्सपो के दौरान हुआ, जो विश्व की सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनियों में से एक है।
आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम की विशेषताएँ
केएसएसएल का माउंटेड आर्टिलरी गन सिस्टम (एमएआरजी) एक अत्याधुनिक तोप प्रणाली है, जिसे कहीं भी तेजी से ले जाया जा सकता है। यह हल्का, मजबूत और हर मौसम में कार्य करने में सक्षम है। आधुनिक युद्ध में, जहां तेजी से स्थान बदलना और दुश्मन को अचानक निशाना बनाना आवश्यक है, ऐसे सिस्टम की मांग बढ़ रही है। इसकी 155 मिमी और 52 कैलिबर वाली तोप 40 किमी से अधिक दूरी तक गोले दाग सकती है। इसके अलावा, यह 20 से अधिक गोले और प्रोपेलेंट चार्ज ले जाने की क्षमता रखता है, जिससे युद्ध के मैदान में इसे बार-बार सप्लाई का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसकी पेटेंटेड सॉफ्ट रिकाइल टेक्नोलॉजी इसे और भी खास बनाती है, जिससे फायरिंग के समय झटका कम होता है।
साझेदारी का महत्व
इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी सेना का मोबाइल टैक्टिकल कैनन (एमटीसी) प्रोग्राम है। एएम जनरल ने अमेरिकी सरकार को प्रस्ताव दिया है कि केएसएसएल की तकनीक पर आधारित 155 मिमी मोबाइल तोप प्रणाली विकसित की जाएगी। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो इसकी डिलीवरी 2027 तक शुरू हो जाएगी। इस समझौते पर भारत के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि यह साझेदारी भारत की उन्नत आर्टिलरी क्षमता पर वैश्विक विश्वास को दर्शाती है। वहीं, एएम जनरल के सीईओ जॉन चैडबोर्ड ने कहा कि दोनों कंपनियों का उद्देश्य सहयोगी देशों को आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावी समाधान प्रदान करना है। यह समझौता केवल एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।