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भारत की रूस यात्रा: सैन्य सहयोग और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन

भारत के आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ ने रूस का दौरा किया, जहां उन्होंने सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण पर चर्चा की। इस दौरे के बीच अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का नया कानून लागू किया है। यह स्थिति भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियाँ पैदा कर सकती है। जानें, भारत और रूस के बीच के संबंधों की गहराई और अमेरिका के दबाव का प्रभाव।
 

भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग

भारत, अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में रूस का दौरा किया। अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की योजना बनाई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। जनरल सेठ का यह दौरा 16 से 18 सितंबर तक रहा, जिसमें उन्होंने रूसी सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान, रक्षा सहयोग, संयुक्त क्षमताओं के विकास और सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।


जनरल सेठ ने रूस के नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा किया और सेंट पीटर्सबर्ग में मिखाइल लोवास मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का भी निरीक्षण किया। यह स्पष्ट है कि भारत और रूस के बीच सैन्य संबंध अभी भी मजबूत हैं।


अमेरिका का नया कानून और भारत की चिंताएँ

हालांकि, अमेरिका ने 18 सितंबर 2026 को एक नया कानून लागू किया, जिसके तहत वह रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार रखता है। यह भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, जो रूस से ऊर्जा खरीदते हैं।


भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास कई दशकों पुराना है, जिसमें भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण हथियार और प्लेटफार्म शामिल हैं। भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका, फ्रांस और इजराइल के साथ भी अपने रक्षा संबंधों को बढ़ाया है।


सैन्य सहयोग की नई संभावनाएँ

भारत और रूस की सेनाएँ प्रशिक्षण तकनीक, सैन्य अनुभव साझा करने और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इसका मतलब है कि भारत अमेरिका से दूर जा रहा है, क्योंकि भारत ने अमेरिका के साथ भी अपने रक्षा संबंधों को मजबूत किया है।


भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के अनुसार साझेदारियों का प्रबंधन करे। हालांकि, अमेरिका का नया टैरिफ कानून इस संतुलन को चुनौती दे सकता है, जिससे भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से विचार करना होगा।