भारत की वायुसेना के लिए राफेल एयरक्राफ्ट की बड़ी डील, पाकिस्तान में बढ़ा डर
भारत की वायुसेना ने फ्रांस से लगभग 114 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना बनाई है, जिससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। इस डील में भारतीय हार्डवेयर का इंटीग्रेशन और मेक इन इंडिया पहल शामिल है। जानें इस डील के संभावित प्रभाव और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के बारे में।
May 25, 2026, 12:51 IST
राफेल विमानों की खरीद से पाकिस्तान में चिंता
माउंटेन ड्यू के एक विज्ञापन की पंचलाइन है, 'डर सुनने में छोटा लगता है, लेकिन जब लगता है, तो बहुत बड़ा होता है।' यह डर पाकिस्तान, जो टेररिस्तान के नाम से जाना जाता है, पर भी लागू होता है। पाकिस्तान असेंबली के पूर्व स्पीकर ने कहा कि भारत के संभावित हमले के डर से सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा की स्थिति चिंताजनक थी। उन्होंने अभिनंदन की रिहाई की अपील की थी। राफेल, जिसका अर्थ है तेज हवा का झोंका, पाकिस्तान के लिए डर का प्रतीक बन गया है। यह विमान एक रात में कई बार पाकिस्तान का दौरा कर सकता है और इस्लामाबाद से रावलपिंडी तक हलचल मचा सकता है। राफेल विमानों का 12 घंटे तक उड़ान भरने का रिकॉर्ड है। अब पाकिस्तान का डर और बढ़ने वाला है, क्योंकि भारतीय वायुसेना फ्रांस से लगभग 114 राफेल विमानों की खरीद करने जा रही है, जो भारतीय वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी डील मानी जा रही है। इस डील पर लगभग ₹3,25,000 करोड़ खर्च होने की संभावना है।
भारतीय हार्डवेयर का इंटीग्रेशन
रिपोर्टों के अनुसार, इन विमानों में भारतीय हार्डवेयर और हथियारों का इंटीग्रेशन किया जाएगा, जिससे भारत को कई सुविधाएं मिलेंगी। इससे विमानों के रखरखाव और मरम्मत में आसानी होगी। भारत लंबे समय से इस प्रकार के विमानों की तलाश में था, और अब यह बताया जा रहा है कि यह तलाश समाप्त हो गई है। हालांकि, भारत और फ्रांस के बीच अभी तक इस डील पर औपचारिक सहमति नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह डील हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने इस डील के बारे में कई जानकारियां साझा की हैं, जिसमें यह पुष्टि की गई है कि यह डील गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट के तहत होगी।
मेक इन इंडिया और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी
इस डील में मेक इन इंडिया और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे क्लॉज़ शामिल हैं, जिससे कुछ विमानों की सीधी खरीद के बाद बाकी विमानों का उत्पादन भारत में किया जा सकेगा। प्रारंभिक उत्पादन में कम से कम 30% स्वदेशी घटकों का उपयोग होगा, और भविष्य में यह बढ़कर 60% तक पहुंच सकता है। आईसीडी या इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट एक ऐसा ढांचा है, जो यह बताता है कि कैसे विमानों के विभिन्न उप-प्रणालियाँ एक-दूसरे के साथ संवाद करती हैं। यदि भारत 114 राफेल विमानों के डील में आईसीडी को शामिल करता है, तो इससे भारत अपने हथियारों और हार्डवेयर को इन विमानों में इंटीग्रेट कर सकेगा।