भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग: वीटो अधिकार की आवश्यकता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की अपनी मांग को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार नहीं दिया जाता है, तो उनकी स्थिति मौजूदा स्थायी सदस्यों की तुलना में कमजोर रहेगी। भारत का मानना है कि जब तक वीटो का प्रावधान है, तब तक सभी स्थायी सदस्यों को समान वीटो अधिकार मिलना चाहिए।
वीटो अधिकार पर भारत का दृष्टिकोण
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने सोमवार को वीटो के मुद्दे पर हुई अंतर-सरकारी वार्ता में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नए स्थायी सदस्यों का एक अलग वर्ग बनाना, जिसके पास वीटो अधिकार न हो, सुरक्षा परिषद की निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई वास्तविक बदलाव नहीं लाएगा। इससे नए सदस्य प्रभावी रूप से 'सेकंड क्लास' सदस्य बन जाएंगे, जबकि मौजूदा पांच शक्तियों का प्रभाव बना रहेगा।
भारत की वीटो अधिकार की मांग का कारण
भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और विस्तार की मांग कर रहा है। नई दिल्ली का तर्क है कि वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के मुकाबले सुरक्षा परिषद की संरचना पुरानी हो चुकी है। भारत चाहता है कि उभरती वैश्विक शक्तियों और लंबे समय से कम प्रतिनिधित्व वाले देशों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित स्थान मिले।
भारत की स्थायी सीट की मुहिम
सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट हासिल करना भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि बदलती वैश्विक शक्ति संरचना में भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश को UNSC में स्थायी भूमिका मिलनी चाहिए। भारत इससे पहले 2021-22 में UNSC का सदस्य रहा था, जो उसका आठवां कार्यकाल था।
2028-29 की सीट पर भारत की नजर
भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए UNSC की गैर-स्थायी सीट भी हासिल करना चाहता है। इसके लिए एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट पर भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होना है। चुनाव जून 2027 में निर्धारित हैं। हालांकि, भारत का मुख्य लक्ष्य स्थायी सदस्यता हासिल करना है।
बराबर वीटो का महत्व
भारत की मांग का स्पष्ट अर्थ है कि यदि UNSC का विस्तार होता है और नए स्थायी सदस्य जोड़े जाते हैं, तो उन्हें मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के समान अधिकार दिए जाने चाहिए। भारत का मानना है कि नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार से बाहर रखना परिषद में असमानता पैदा करेगा।
UNSC में सुधार की आवश्यकता
UNSC की स्थापना 1945 में हुई थी, और तब से दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। कई नए देश वैश्विक शक्ति के रूप में उभरे हैं, लेकिन परिषद की स्थायी सदस्यता अभी भी पांच देशों तक सीमित है। भारत का कहना है कि UNSC को आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए।