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भारत के उद्योगों पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव और मोदी सरकार की रणनीतियाँ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का प्रभाव भारतीय उद्योगों पर पड़ रहा है। मोदी सरकार ने इस चुनौती का सामना करने के लिए मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और जीएसटी दरों में कटौती करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, भारत चीन, जापान और रूस जैसे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जानें इस स्थिति में भारत की रणनीतियाँ और संभावनाएँ क्या हैं।
 

अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव


राकेश सिंह | वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में टैरिफ का मुद्दा काफी चर्चा में है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है, जो 27 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है। इसका कारण भारत का रूस से तेल और हथियारों की खरीद है। यह टैरिफ भारत के 48.2 बिलियन डॉलर के निर्यात को प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना है कि मोदी सरकार इस स्थिति का सामना कैसे करेगी।


मोदी सरकार की प्रतिक्रिया

ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण भारत के निर्यातक चिंतित हैं, विशेषकर तमिलनाडु जैसे राज्यों में। मोदी सरकार ने इस संकट का सामना करने के लिए मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से घरेलू उत्पादों को खरीदने की अपील की है। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा की है ताकि उपभोक्ता अधिक खर्च कर सकें और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।


भारत की व्यापारिक रणनीति

यह टैरिफ केवल भारत को ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल रहा है। मोदी सरकार का उद्देश्य व्यापार को विविधता प्रदान करना है, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कम हो सके। इस संदर्भ में, मोदी जी का चीन दौरा महत्वपूर्ण है, जो 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक होगा। यह उनका सात वर्षों में पहला दौरा है, जहां वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के पुतिन से मिलेंगे।


भारत के लिए नए अवसर

चीन के अलावा, भारत जापान और रूस जैसे देशों के साथ भी संबंध मजबूत कर रहा है। जापान में मोदी जी का दौरा 29-30 अगस्त को होगा, जहां वे सुरक्षा और व्यापार के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, भारत ब्राजील और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भी व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


सरकार की योजनाएँ

अमेरिकी टैरिफ से उद्योगों को बचाने के लिए, सरकार ने कुछ क्षेत्रों जैसे फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट दी है। हालांकि, स्टील और कृषि उत्पादों पर इसका असर पड़ेगा। सरकार निर्यातकों को आश्वासन दे रही है कि वे उनके साथ हैं और नई योजनाएँ लाएंगे। पीएम मोदी ने कहा है कि वे संप्रभुता पर समझौता नहीं करेंगे।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह टैरिफ भारत के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है। चीन के साथ नए संबंध, जापान और रूस जैसे मित्र देशों के साथ सहयोग, और घरेलू उद्योग को सशक्त बनाना मोदी सरकार की योजना है। उम्मीद है कि ये कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और लाखों नौकरियों की रक्षा करेंगे।