भारत के एफसीआरए कानून में बदलाव से अमेरिका की चिंता बढ़ी
भारत ने अपने विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे अमेरिका की चिंता बढ़ गई है। इस बदलाव के बाद, अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए भारत में एनजीओ और मिशनरियों को फंडिंग करना मुश्किल हो जाएगा। अमेरिका की राजनीतिक पार्टियों ने इस कानून में बदलाव की आलोचना की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने अमेरिका पर एक बड़ा प्रहार किया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या है।
Jun 15, 2026, 19:59 IST
भारत का एक्शन और अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ उठाए गए कदम वास्तव में एक प्रतिक्रिया के रूप में देखे जा रहे हैं। असली कदम तो भारत ने उठाए हैं, जिन पर चर्चा नहीं हो रही है। भारत पर टैरिफ लगाने, एच1 बी वीजा के खिलाफ बयान देने और भारतीय नाविकों पर हमले जैसे कार्य अमेरिका द्वारा किए जा रहे हैं। असल में, भारत ने अमेरिका के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका की बौखलाहट सामने आई है। अमेरिका इस बात से नाराज है कि भारत अभी तक व्यापार समझौता फाइनल नहीं कर सका है और एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में प्रवेश नहीं करने दे रहा है। इस निर्णय ने अमेरिका की नींव को हिला दिया है। पीएम मोदी ने अमेरिकी गुप्त तंत्र के कई प्रभावशाली व्यक्तियों को चुनौती दी है, जिसके बाद उन पर भारत के खिलाफ कदम उठाने का दबाव डाला गया है।
अमेरिका की राजनीतिक प्रतिक्रिया
आपने देखा होगा कि पीएम मोदी की सरकार को गिराने के लिए कई बार प्रयास किए गए हैं। अमेरिकी गुप्त तंत्र के एक प्रमुख व्यक्ति जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि वह पीएम मोदी को हटाने के लिए 1 बिलियन डॉलर तक खर्च करने को तैयार हैं। अमेरिका में कई ऐसे लोग हैं जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। पीएम मोदी ने अमेरिका के उसी हथियार पर हमला किया है, जिसका उपयोग अमेरिका भारत को अस्थिर करने के लिए कर रहा था। हाल ही में, अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने भारत के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना की है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने इस कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर भारत में काम कर रहे एनजीओ को फंडिंग भेजी थी।
एफसीआरए कानून में बदलाव का प्रभाव
क्रिश्चियन मिशनरियों को फंडिंग देने का काम अब रुक जाएगा, क्योंकि भारत ने एफसीआरए कानून में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। अमेरिका अब भारत के किसी घरेलू कानून को रोकने के लिए बेताब हो गया है, जो यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका पर एक बड़ा प्रहार किया है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि भारत के एफसीआरए कानून में बदलाव को किसी भी कीमत पर रोकना होगा। यदि यह कानून पारित हो गया, तो अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए भारत में क्रिश्चियन मिशनरियों और एनजीओ को फंडिंग करना मुश्किल हो जाएगा। यह किसी से छिपा नहीं है कि अमेरिका से आने वाले पैसे का उपयोग भारत में कैसे किया जाता है।
भारत की सुरक्षा और एनजीओ पर नियंत्रण
भारत एफसीआरए कानून में जो बदलाव कर रहा है, उससे अमेरिकी दान पर निर्भर संस्थाएं और एनजीओ अब गलत काम नहीं कर पाएंगे। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है और उनके खातों को फ्रीज किया जा सकता है। सरकार का इन एनजीओ पर नियंत्रण और भी बढ़ जाएगा। अमेरिका जिस पैसे से भारत में सरकार गिराने की कोशिशें करता है, वह अब रुक जाएगा। 2010 का एफसीआरए कानून इतना कमजोर था कि इसके कारण कई एनजीओ ने धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे कार्यों के लिए विदेशी चंदा जुटाना शुरू कर दिया था। अब यह सब कुछ रुक जाएगा। अमेरिका इस कानून से इतना चिंतित है कि उसने हाल ही में अपने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को कोलकाता भेजा।