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भारत के विकास पर विपक्ष की निरंतर आलोचना: एक गंभीर चिंता

भारत की विकास दर 7.8% पर विपक्ष की निरंतर आलोचना एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जब भी देश कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, विपक्ष उसे नकारने की कोशिश करता है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है, लेकिन विपक्ष ने इसे कमतर बताने का प्रयास किया है। इस लेख में भारत की विकास दर, विपक्ष की आलोचना और वैश्विक संकटों के बावजूद देश की मजबूती पर चर्चा की गई है।
 

विपक्ष की विकास विरोधी मानसिकता


यह एक अजीब स्थिति है कि भारत में विपक्ष को देश के विकास से कोई खुशी नहीं होती। जब भी भारत के विकास के आंकड़े सामने आते हैं, विपक्ष उन पर सवाल उठाने लगता है। जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करता है, तो विपक्ष उसे नकारने की कोशिश करता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष की यह मानसिकता इतनी गैरजिम्मेदार हो गई है कि वह भारत के विकास के प्रयासों की विफलता की कामना करता है।


हाल ही में जारी आर्थिक विकास के आंकड़ों के संदर्भ में, भारत की विकास दर 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक की अपेक्षा से अधिक है। लेकिन जैसे ही यह आंकड़ा सामने आया, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसमें कमी निकालने का प्रयास किया।


विपक्ष ने शुरुआत में कृषि और खनन क्षेत्रों में विकास दर कम रहने का मुद्दा उठाया। लेकिन जब एक रिटायर आईएएस अधिकारी ने आंकड़ों को गलत बताते हुए विकास दर को 2.6 प्रतिशत बताया, तो कांग्रेस के नेता इस पर खुशी से उछल पड़े।


वास्तव में, केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार विकास दर के आकलन का आधार वर्ष बदला है। पहले 2011-12 के आधार पर विकास दर का आकलन होता था, जबकि अब देश की अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आ चुका है।


इसलिए, नए आधार वर्ष के अनुसार विकास दर का आकलन करना आवश्यक है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सेब की तुलना संतरे से नहीं की जानी चाहिए।


विपक्ष को यह समझना चाहिए कि नए आधार वर्ष के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही का जीडीपी आंकड़ा 80 लाख करोड़ रुपए था, जबकि 2026-27 की पहली तिमाही का आंकड़ा 88 लाख करोड़ रुपए है।


इस प्रकार, वास्तविक विकास दर 7.8 प्रतिशत है। इसके बावजूद, कांग्रेस देश को बदनाम करने वाली ताकतों के प्रचार में जुटी है।


महंगाई दर नियंत्रण में है, वित्तीय घाटा काबू में है, और ब्याज दरें भी स्थिर हैं। यह भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।


अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि कई देश भारत और अमेरिका की दोस्ती से जलते हैं। यह भारत की बढ़ती ताकत का संकेत है।


भारत विरोधी ताकतें यह देखकर हैरान हैं कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की विकास दर में कमी नहीं आई है। कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बावजूद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बनाए रखा है।


भारत ने ईंधन आपूर्ति में विविधता लाने का सफल प्रयास किया है और अब वह अमेरिका, वेनेजुएला और अफ्रीकी देशों से कच्चा तेल और एलपीजी आयात कर रहा है।


भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भरा हुआ है और जन कल्याण की योजनाएं पहले जैसी चल रही हैं। सरकार ने सभी योजनाओं को जारी रखा है और उनकी राशि में कोई कटौती नहीं की है।


भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि की है और अमेरिका, कनाडा सहित कई देशों के साथ वार्ता निर्णायक चरण में है।


इन प्रयासों का परिणाम भविष्य के आर्थिक विकास के आंकड़ों में दिखाई देगा। विपक्ष को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।