भारत को चीन की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने की आवश्यकता: अनंत गोयनका
भारत का औद्योगिक विकास और चीन की भूमिका
चीन की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने की सोच भारत के विकास के लिए एक चुनौती बन सकती है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अनंत गोयनका का मानना है कि भारत को चीन से दूरी बनाने के बजाय उसके साथ कारोबारी संबंधों को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैनुफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में गहराई से शामिल होने के लिए यह आवश्यक है। फिक्की के सीईओज के एक समूह की चीन यात्रा के बाद गोयनका ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
पहला, चीन एक प्रतिस्पर्धात्मक बाजार है, जहां कंपनियां केवल 2-3 प्रतिशत मुनाफे पर काम करती हैं। इस कठिन प्रतिस्पर्धा में केवल मजबूत और उत्कृष्ट कंपनियां ही टिक पाती हैं। दूसरा, अनुसंधान एवं विकास और ऑटोमेशन चीन में उच्चतम स्तर पर हैं, जहां कंपनियां दीर्घकालिक निवेश करती हैं।
तीसरा, चीनी सरकार एक मूक भागीदार की तरह कार्य करती है, जो सस्ते कर्ज, भूमि, बिजली और नीतिगत समर्थन प्रदान करती है। इस कारण से, अन्य देशों की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा का स्तर समान नहीं रह जाता। गोयनका की टिप्पणियां भारतीय व्यापारिक मानसिकता में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती हैं।
भारतीय उद्योगपति अब इस डर से बाहर आ गए हैं कि चीन भारत पर हावी हो सकता है। इसके बजाय, यह विचार उभरा है कि औद्योगिक विकास के अगले चरण में जाने के लिए चीनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ना आवश्यक हो गया है।
हालांकि, गोयनका का यह तर्क कि भारत को औद्योगिक विकास के पारंपरिक चरणों को छोड़कर सीधे डिजिटल एकीकरण की ओर बढ़ना चाहिए, विवादास्पद है। यह ध्यान देने योग्य है कि हर विकसित देश ने ऑटोमेशन को तब अपनाया जब उसने बड़े पैमाने पर उत्पादन को व्यवस्थित करना सीख लिया था। भारत बिना अपनी आधारभूत संरचना तैयार किए सीधे शीर्ष पर नहीं पहुंच सकता।