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भारत-चीन के बीच SCO बैठक से रिश्तों में सुधार की नई उम्मीद

भारत और चीन के बीच हाल ही में हुई SCO द्विपक्षीय बैठक ने दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की नई संभावनाएं प्रस्तुत की हैं। इस बैठक में सुरक्षा, व्यापार और संपर्क जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया है, जिससे उच्च स्तरीय दौरे की संभावनाएं बढ़ गई हैं। जानें इस बैठक के प्रमुख बिंदु और भविष्य में क्या हो सकता है।
 

भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बैठक


नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच तनाव में कमी आने के बाद, दोनों देशों ने अपने संबंधों को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लद्दाख गतिरोध के समाधान के बाद, 16-17 अप्रैल को पहली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक को दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


बैठक में चर्चा के मुख्य मुद्दे

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सुरक्षा, व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों पर गहन चर्चा की गई। चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया है, जिससे उच्च स्तरीय दौरे की संभावनाएं बढ़ गई हैं।


SCO में सहयोग को बढ़ावा

दोनों देशों ने SCO के निर्णयों को लागू करने और संगठन की भविष्य की दिशा पर विचार साझा किया। भारत और चीन ने SCO मंच पर आपसी संवाद और सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।


BRICS पर ध्यान केंद्रित

चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का पूरा समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी 14-15 मई को BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत आने की संभावना है। इसके अलावा, शी जिनपिंग के सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत दौरे की भी उम्मीद है।


भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण

भारत ने SCO में आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही, कनेक्टिविटी की किसी भी पहल में सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान आवश्यक बताया गया।


पीएम मोदी का संदेश

पिछले वर्ष के SCO शिखर सम्मेलन में, पीएम नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली कनेक्टिविटी न तो विश्वसनीय होती है और न ही टिकाऊ। भारत आज भी इस रुख पर अडिग है।


भविष्य की संभावनाएं

यह बैठक दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। यदि उच्च स्तरीय दौरे होते हैं, तो व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में और प्रगति हो सकती है। यदि जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह रिश्तों में और सुधार का संकेत हो सकता है। जिनपिंग के इस निर्णय से उनके मित्र पाकिस्तान को फिर से चिंता हो सकती है।