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भारत चुनाव आयोग में विवाद: कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल

भारत चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई हैं। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव में हैं और चुनावी प्रक्रिया में धांधली कर रहे हैं। इस विवाद का केंद्र 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) है, जिसका प्रभाव 13 करोड़ मतदाताओं पर पड़ रहा है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया।
 

भारत चुनाव आयोग में उठे मतभेद


भारत चुनाव आयोग में विवाद: भारत के चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई हैं, जिससे नया विवाद उत्पन्न हो गया है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव में हैं और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे हैं।


कांग्रेस ने बुधवार को एक पोस्ट में कहा, 'मोदी के प्रिय ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मर्जी चला रहे हैं। पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने 14 बार शिकायत की है कि उन्हें महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी नहीं दी जाती। बिना उनकी सलाह के फैसले लिए जा रहे हैं। ये शिकायतें मुख्य रूप से SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए मतदाता पंजीकरण, और वोटर लिस्ट से नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित हैं।'


कांग्रेस ने आगे कहा, 'इन शिकायतों से स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग में केवल ज्ञानेश कुमार का ही वर्चस्व है। वह मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में धांधली कर रहे हैं। हम पहले भी कह चुके हैं कि मोदी ने चुनाव आयोग पर नियंत्रण कर लिया है। ज्ञानेश कुमार मोदी के इशारों पर चल रहे हैं। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि मोदी और ज्ञानेश ने देश के लोकतंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। लेकिन याद रखें, समय आने पर सभी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।'



विवाद का सारांश:


भारत चुनाव आयोग तीन सदस्यों से मिलकर बना है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच में पता चला है कि पिछले 10 महीनों में, दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों के खिलाफ 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं। संधू और जोशी का आरोप है कि महत्वपूर्ण निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए हैं। यह विवाद विशेष रूप से 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) पर केंद्रित है, जिसका प्रभाव 13 करोड़ मतदाताओं के नामों पर पड़ रहा है। चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाता पंजीकरण के लिए 'फॉर्म 6' में किए गए 'अनधिकृत' बदलावों को चुनौती दी है।


जांच में यह भी सामने आया है कि आयोग के भीतर इन मुद्दों पर कई बार सवाल उठाए गए हैं। संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति जताई है, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है।