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भारत ने UN मंच पर पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों का किया पर्दाफाश

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया है। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने रावलकोट में हालिया हिंसा और नागरिकों की मौत पर चिंता जताई। उन्होंने पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि स्थानीय नागरिकों को बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि उसे अपने आंतरिक संकटों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस आक्रामक रुख ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को कमजोर किया है।
 

भारत का कड़ा रुख


नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हो रहे अमानवीय अत्याचारों को उजागर किया है। शहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की दमनकारी नीतियों के चलते पूरा पीओजेके इस समय विरोध की लहर में है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को घेरते हुए इस गंभीर स्थिति पर वैश्विक चुप्पी को तोड़ने का प्रयास किया है। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जो लोग अपने बुनियादी अधिकारों, जैसे रोटी और बिजली की मांग कर रहे हैं, उन्हें पाकिस्तानी सरकार द्वारा गोलियों और संगीनों से दबाया जा रहा है।


रावलकोट में हिंसा का मुद्दा

अनुपमा सिंह ने जिनेवा में चल रहे सत्र के दौरान रावलकोट में हाल ही में हुई हिंसा और निर्दोष नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया। भारत ने बताया कि पीओजेके में हो रही त्रासदी, मानवाधिकारों का उल्लंघन और नागरिकों का दमन पाकिस्तान की पुरानी क्रूर नीतियों का परिणाम है। यह कड़ा रुख तब अपनाया गया जब 14 जून 2026 को रावलकोट के ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई की थी।


अंधाधुंध गोलीबारी

'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (JKJAAC) के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे कम से कम दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। इस दमनकारी कार्रवाई के तुरंत बाद, अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचने के लिए रावलकोट क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गईं।


पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति

अनुपमा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को एक सैन्य छावनी में बदल दिया है। स्थानीय नागरिकों की भूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं और जानबूझकर जनसांख्यिकीय बदलाव किए जा रहे हैं ताकि मूल निवासियों को अल्पसंख्यक बनाया जा सके। नागरिकों को बुनियादी और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं से वंचित रखा गया है। इसके अलावा, संगठन ने आरोप लगाया कि आपातकालीन स्थिति में खाद्य सामग्री की आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।


पाकिस्तान को सख्त चेतावनी

मानवाधिकार परिषद के मंच से भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि उसे भारत के क्षेत्रों पर झूठे दावे करने के बजाय अपने आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक संकट को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। भारत ने मांग की कि पाकिस्तान तुरंत PoJK के नागरिकों पर बल प्रयोग बंद करे और उनकी समस्याओं का सम्मानपूर्वक समाधान निकाले। भारत का यह आक्रामक रुख वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की घेराबंदी को और मजबूत कर रहा है।