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भारत ने UNSC सुधारों पर दोहराया कड़ा रुख, वीटो अधिकार का विस्तार जरूरी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए अपने कड़े रुख को दोहराया है। राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि यदि स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार बिना वीटो अधिकार के किया गया, तो मौजूदा असंतुलन और असमानता बनी रहेगी। उन्होंने सुरक्षा परिषद की संरचना को 80 साल पुरानी बताते हुए इसके सुधार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। जानें इस मुद्दे पर भारत का क्या कहना है और क्यों यह सुधार महत्वपूर्ण है।
 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों के प्रति अपने दृढ़ रुख को स्पष्ट किया है। मंगलवार को अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में, भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि यदि परिषद में स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार बिना वीटो शक्ति के किया गया, तो मौजूदा असंतुलन और असमानता बनी रहेगी।


उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा परिषद की वैधता और प्रतिनिधित्व पर उठने वाले सवालों का मुख्य कारण इसकी सदस्यता संरचना और वीटो अधिकार हैं।


राजदूत ने कहा कि यदि वीटो के साथ या उसके बिना नई श्रेणी पर विचार किया गया, तो यह पहले से चल रही चर्चा को और जटिल बना देगा। उन्होंने दो मुख्य कारणों का उल्लेख किया, जिनकी वजह से परिषद की संरचना असंतुलित है।


हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर व्यापक सहमति है, क्योंकि इसकी संरचना 80 साल पहले बनी थी और अब यह वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।


उन्होंने 1960 के दशक में परिषद में किए गए एकमात्र सुधार का उल्लेख किया, जिसने वीटो अधिकार वाले देशों की ताकत को बढ़ाया।


उन्होंने कहा कि यदि सुधारों में वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया गया, तो यह मौजूदा असंतुलन को और बढ़ाएगा।


भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है।