भारत ने अमेरिका के टेरिफ प्रस्ताव को चुनौती दी, जबरन मजदूरी पर सख्त कानून लागू
भारत ने अमेरिका के प्रस्तावित टेरिफ को चुनौती देते हुए जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का नया कानून लागू किया है। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि भारत इस मुद्दे पर पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा था। लेकिन भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि अब ऐसे सामान का आयात नहीं होगा। इस कदम से भारत ने अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी प्रभाव डाल सकता है।
Jul 15, 2026, 20:01 IST
भारत का नया कदम अमेरिका की रणनीति को झटका
अमेरिका भारत पर एक और टेरिफ लगाने की योजना बना रहा था, लेकिन इससे पहले ही भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसने ट्रंप प्रशासन की रणनीति को प्रभावित किया है। अमेरिका का आरोप था कि भारत जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा था। इसी आधार पर अमेरिका ने भारत पर एक और टेरिफ लगाने की तैयारी की थी। लेकिन भारत ने अमेरिका के निर्णय से पहले ही एक नया कानून लागू कर दिया, जिससे वाशिंगटन की दलील को चुनौती मिली। भारत सरकार ने अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव करते हुए यह घोषणा की कि अब जबरन मजदूरी से बने किसी भी सामान का आयात भारत में नहीं होगा। इस प्रकार, अमेरिका द्वारा उठाए गए मुद्दे पर भारत ने पहले ही सख्त कदम उठाए हैं।
अमेरिका की जांच और भारत की प्रतिक्रिया
यह मामला काफी जटिल है। हाल ही में, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत सहित 60 देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच शुरू की थी। अमेरिका ने आरोप लगाया कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इस जांच के आधार पर, अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों के सामान पर 12.5% अतिरिक्त टेरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा। यदि यह टेरिफ लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक शुल्क चुकाना पड़ सकता है, जिससे कई भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे। लेकिन इस बीच, भारत ने भी तेजी से कदम उठाए। 13 जुलाई को, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने एक नई अधिसूचना जारी की, जिसमें स्पष्ट किया गया कि अब ऐसा कोई सामान भारत में आयात नहीं किया जाएगा जिसे पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी से तैयार किया गया हो। यदि किसी उत्पाद को लोगों की इच्छा के खिलाफ धमकी देकर या दबाव डालकर बनाया गया है, तो भारत उस उत्पाद के आयात पर रोक लगा सकता है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के प्रति प्रतिबद्धता
सरकार ने जबरन मजदूरी की परिभाषा को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के 1930 के कन्वेंशन के अनुसार अपनाया है। इससे भारत ने यह संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप अपने व्यापारिक ढांचे को तैयार कर रहा है। लेकिन भारत ने केवल नियम बनाकर नहीं रुका। अमेरिका की 301 जांच पर भी भारत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। अमेरिका में हुई सुनवाई के दौरान वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा कि इस तरह के मामलों का समाधान एकतरफा टेरिफ लगाकर नहीं, बल्कि व्यापार वार्ता के माध्यम से होना चाहिए। भारत ने अमेरिका के रवैये पर भी सवाल उठाए। भारतीय पक्ष ने कहा कि अमेरिका खुद लगभग 1600 उत्पादों को अपनी जांच के दायरे से बाहर रखता है। यदि उद्देश्य वास्तव में जबरन मजदूरी को रोकना है, तो फिर इतनी बड़ी छूट क्यों दी जा रही है? भारत ने यह भी कहा कि अमेरिकी नीति कुछ मामलों में अपने ही उत्पादों को बढ़ावा देती है। इसलिए केवल दूसरे देशों पर अतिरिक्त टेरिफ लगाना उचित नहीं है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपने नियमों को मजबूत किया है, और दूसरी ओर, अमेरिका के प्रस्तावित टेरिफ पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई है। इस पूरे मामले का असर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी पड़ सकता है, क्योंकि दोनों देश इस समय एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।