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भारत ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, ट्रंप की नीतियों का किया सामना

भारत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों का सामना करते हुए उन्हें एक बड़ा झटका दिया है। ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ का भारत ने मजबूती से जवाब दिया, जिससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लगभग ₹4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। इस लेख में जानें कि भारत ने बिना युद्ध के कैसे ट्रंप से बड़ी जीत हासिल की और उसकी आर्थिक रणनीति क्या है।
 

भारत की मजबूती और अमेरिका के साथ टकराव

जब नीति सही हो, इरादे मजबूत हों और नियत साफ हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको पराजित नहीं कर सकती। भारत ने कई मौकों पर यह साबित किया है। जो भी भारत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करता है, उसे भारत ने ऐसा जवाब दिया है कि वह इतिहास में दर्ज हो गया। हाल ही में, भारत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भी ऐसा ही किया। ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाने की कोशिश की, यह सोचकर कि भारत झुक जाएगा और रूस से अपने संबंध तोड़ लेगा। लेकिन भारत ने मजबूती से जवाब दिया और ट्रंप को ऐसा उल्टा दांव मारा कि अमेरिका को टैरिफ से कहीं अधिक नुकसान हुआ।


मैं आपको बताऊंगा कि भारत ने बिना किसी युद्ध के ट्रंप से कैसे बड़ी जीत हासिल की। साथ ही, यह भी बताऊंगा कि भारत ने ट्रंप से टैरिफ का क्या बदला लिया है, जिसने अमेरिका को हिला कर रख दिया है। अंत में, मैं यह भी बताऊंगा कि भारत ने अमेरिका को बड़ा झटका देते हुए उसकी अर्थव्यवस्था को लगभग ₹4 लाख करोड़ का नुकसान पहुँचाया। दरअसल, ट्रंप यह भूल गए थे कि भारत समय के साथ उन्हें ऐसी पटकनी देगा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।


विकसित देश अमेरिकी बॉंड और डॉलर को सुरक्षित निवेश मानते हैं। अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच, विकसित देश अमेरिकी सरकारी बॉंड्स और डॉलर में निवेश कर रहे हैं। जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन इसमें पूंजी लगा रहे हैं, जबकि भारत, चीन और ब्राजील जैसे ब्रिक्स देश इससे दूरी बना रहे हैं। पिछले एक साल में, भारत, चीन और ब्राजील ने अमेरिकी बॉंड में निवेश 183 अरब डॉलर घटाया है। भारत के पास अक्टूबर 2025 में 190.7 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी बॉंड्स थे, जबकि अक्टूबर 2024 में यह आंकड़ा 241.4 अरब डॉलर था। इसका मतलब है कि इसमें 40% की भारी गिरावट आई है।


डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट

ग्लोबल फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। पिछले 5 वर्षों में इसमें 18% की कमी आई है। आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का अमेरिका की ट्रेजरी में निवेश तेजी से घट रहा है। महज एक साल में इसमें 21% की गिरावट देखी गई है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लगभग ₹4.5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। यह देश की विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन रणनीति में बदलाव की ओर इशारा करता है। सरकार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे आर्थिक और भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच यह रणनीति अपनाई है।


इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे उतार-चढ़ाव से बचना है। भारत की नीति स्पष्ट है: डॉलर पर निर्भरता को कम करके एक संतुलित विदेशी भंडार प्रणाली बनाना। विकसित देश भी इस रणनीति के तहत अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटा रहे हैं।