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भारत ने उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक की शुरुआत की

भारत ने सोमवार को नई दिल्ली में उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक का शुभारंभ किया, जो देशों का मूल्यांकन नागरिकों, पर्यावरण और वैश्विक समुदाय के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर करेगा। इस पहल का उद्देश्य नैतिक शासन और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। यह सूचकांक तीन वर्षों के गहन अध्ययन का परिणाम है और इसे वैश्विक संवाद की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
 

नई पहल का शुभारंभ

नई दिल्ली: भारत ने सोमवार को एक नई वैश्विक पहल, उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक, का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस सूचकांक की विशेषता यह है कि इसमें देशों का मूल्यांकन केवल आर्थिक शक्ति या अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि नागरिकों, पर्यावरण और वैश्विक समुदाय के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर किया जाएगा।


मुख्य अतिथि का संबोधन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ने अपने संबोधन में कहा कि नैतिक शासन, समावेशी विकास और जिम्मेदारी किसी भी देश के स्थायी भविष्य के लिए आवश्यक हैं।


विशेषज्ञों की उपस्थिति

इस अवसर पर नीति निर्माण से जुड़े कई लोग, न्यायविद, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और राजनयिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे इस पहल की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्ता स्पष्ट हुई।


अध्ययन का परिणाम

उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक तीन वर्षों के गहन अकादमिक और नीतिगत अध्ययन का परिणाम है। इसका उद्देश्य देशों की प्रगति को जिम्मेदारी और नैतिकता के दृष्टिकोण से देखना है। इस सूचकांक की प्रेरणा भारत की सभ्यतागत परंपराओं धर्म, संतुलन और वैश्विक कल्याण से ली गई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों ने इसके शोध और ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


विशेषज्ञ चर्चा

शुभारंभ से पहले मानव कल्याण से वैश्विक जिम्मेदारी तक विषय पर एक विशेषज्ञ चर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंद्रहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन. के. सिंह ने की। इस चर्चा में अशोका विश्वविद्यालय की प्रोफेसर प्राची मिश्रा, सामाजिक और आर्थिक प्रगति केंद्र के लवेश भंडारी तथा एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकांत मिश्रा शामिल रहे।


उद्घाटन सत्र में विचार

उद्घाटन सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति संतिश्री डी. पंडित, भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के निदेशक मनोज कुमार तिवारी, पेरिस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एडुआर्ड हुस्सों और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुण कुमार मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए।


सूचकांक का महत्व

इस अवसर पर वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के संस्थापक सुधांशु मित्तल ने कहा कि यह सूचकांक देशों के मूल्यांकन की सोच में बुनियादी बदलाव लाता है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपनी शक्ति का उपयोग कितनी जिम्मेदारी से करता है, यही उसके भविष्य को तय करता है। बिना जिम्मेदारी के समृद्धि टिकाऊ नहीं हो सकती।


रिपोर्ट का विमोचन

कार्यक्रम के अंत में उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक की रिपोर्ट जारी की गई, जिसे इक्कीसवीं सदी में जिम्मेदार राष्ट्रों पर वैश्विक संवाद की शुरुआत बताया गया।