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भारत ने ओआईसी को दिया करारा जवाब, कश्मीर पर पाकिस्तान की दुष्प्रचार का किया पर्दाफाश

भारत ने हाल ही में इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी द्वारा जम्मू कश्मीर पर किए गए नकारात्मक बयानों का कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं। इस दौरान, भारतीय डिप्लोमेट ने पाकिस्तान को पीओके खाली करने का अल्टीमेटम दिया। जानिए इस मुद्दे पर भारत का क्या कहना है और ओआईसी की प्रतिक्रिया क्या रही।
 

भारत का स्पष्ट संदेश

भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट किया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और यह स्थिति हमेशा बनी रहेगी। अब चर्चा केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर केंद्रित है, जिसे पाकिस्तान ने दशकों से अपने अधीन रखा है। हालांकि, कुछ लोग इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले कट्टरपंथी देश अक्सर कश्मीर के मुद्दे पर नए-नए प्रोपेगेंडा पेश करते हैं। लेकिन भारत ने हमेशा इन देशों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। हाल ही में, जब इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने जम्मू कश्मीर पर नकारात्मक बयान दिया, तो भारत ने 57 मुस्लिम देशों को एक साथ कड़ा संदेश दिया।


ओआईसी की बैठक और भारत का जवाब

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान ओआईसी की बैठक हुई, जिसमें संगठन ने कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया। ओआईसी ने मानवाधिकारों और सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए भारत से 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग की। इसके जवाब में, भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें ओआईसी के जम्मू कश्मीर पर की गई टिप्पणियों को खारिज किया गया। मंत्रालय ने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इस तरह के राजनीतिक दुष्प्रचार से वास्तविकता नहीं बदल सकती।


पाकिस्तान को अल्टीमेटम

भारत ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपने मनगढ़ंत दुष्प्रचार के लिए मंच उपलब्ध कराने के बजाय ओवैसी को सलाह दे। इस प्रकार, भारत ने ओआईसी के 57 मुस्लिम देशों के संगठन की हेकड़ी को समाप्त कर दिया। भारतीय डिप्लोमेट क्षितज त्यागी ने यूएन में पीओके के मुद्दे पर पाकिस्तान को अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कश्मीर और भारत में मुस्लिमों पर पाकिस्तान की नकारात्मक टिप्पणियों की आलोचना की और जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। हाल ही में, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने जम्मू कश्मीर का दौरा करते हुए यह स्पष्ट किया था कि यह क्षेत्र हमेशा से भारत का हिस्सा रहा है।