भारत ने परमाणु ऊर्जा में नया मील का पत्थर स्थापित किया
भारत ने कलपक्कम में स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में क्रिटिकिटी हासिल कर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश की सिविल न्यूक्लियर यात्रा का एक निर्णायक मोड़ बताया है। यह उपलब्धि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। जानें इस तकनीक की विशेषताएं और भारत की स्थिति इस क्षेत्र में।
Apr 8, 2026, 11:44 IST
भारत की नई उपलब्धि
भारत ने एक ऐसा कार्य किया है जिसे पश्चिमी देशों ने असंभव माना था। तकनीकी दृष्टि से इसे संभव नहीं समझा गया था। लेकिन आज भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम परमाणु परिसर में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने क्रिटिकिटी प्राप्त कर ली है। इसका मतलब है कि यह रिएक्टर अब बिना किसी बाहरी सहायता के स्वयं न्यूक्लियर रिएक्शन को बनाए रख सकता है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि भारत ने आधिकारिक तौर पर अपने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में प्रवेश कर लिया है।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की सिविल न्यूक्लियर यात्रा का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह उपलब्धि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी, जिन्होंने इस जटिल तकनीक को सफल बनाया। यह कोई साधारण रिएक्टर नहीं है, बल्कि एक ब्रीडर रिएक्टर है, जो जितना ईंधन जलाता है, उससे अधिक नया ईंधन उत्पन्न करता है। यह प्लूटोनियम 239 का निर्माण करता है और भविष्य के लिए ईंधन का भंडार तैयार करता है। इसका मतलब है कि ईंधन की कमी नहीं होगी। जबकि पश्चिमी देशों ने इस तकनीक में असफलता का सामना किया, भारत ने सफलता प्राप्त की है। अमेरिका, जापान, जर्मनी और फ्रांस ने इस तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन सोडियम लीक और फायर एक्सपेंसिव सिस्टम के कारण उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा।
भारत की स्थिति
कई देशों को इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा, लेकिन भारत ने 20 वर्षों की मेहनत और स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। अब भारत और रूस के पास ही कमर्शियल स्केल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर हैं। इसका मतलब है कि भारत अब न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के शीर्ष क्लब में शामिल हो चुका है। यह तीन स्टेज का गेम चेंजर प्लान है, जिसकी शुरुआत महान वैज्ञानिक होमी भाबा के दृष्टिकोण से हुई थी।