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भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को मान्यता देने से किया इनकार

भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच गठित सीमा आयोग को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस व्यवस्था का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह मामला जम्मू-कश्मीर के उन क्षेत्रों से जुड़ा है, जिन्हें पाकिस्तान ने अपने कब्जे में रखा है। 1963 में हुए सीमा समझौते को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी। जानें इस विवाद की जड़ें और भारत का आधिकारिक रुख क्या है।
 

भारत का स्पष्ट इनकार


भारत ने बुधवार को पाकिस्तान और चीन के बीच स्थापित तथाकथित सीमा आयोग को मान्यता देने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस व्यवस्था का कोई वैध आधार नहीं है।


पाकिस्तान का अधिकार नहीं

जायसवाल ने बताया कि पाकिस्तान के कब्जे में आए भारतीय क्षेत्रों के संबंध में वह किसी तीसरे देश के साथ सीमा समझौता करने का अधिकार नहीं रखता। यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान और चीन के बीच चर्चा में जो सीमा है, वह उस क्षेत्र से संबंधित है जिसे भारत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है।


विवाद की जड़ें

भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने 1947-48 के युद्ध के बाद जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किया और बाद में उसी क्षेत्र से संबंधित चीन के साथ समझौता किया। इस विवाद को समझने के लिए 1947 के विभाजन के बाद की स्थिति को देखना आवश्यक है। उस समय जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में भारत के साथ विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष शुरू हुआ।


कब्जे का मुद्दा

1947-48 के युद्ध के परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया। भारत का आधिकारिक रुख यह है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और पाकिस्तान का उन पर कब्जा अवैध है। इसी आधार पर नई दिल्ली पाकिस्तान को उन क्षेत्रों के संबंध में किसी अन्य देश के साथ समझौता करने का अधिकार नहीं देती।


1963 का सीमा समझौता

विवाद का एक और महत्वपूर्ण मोड़ 2 मार्च 1963 को आया, जब चीन और पाकिस्तान ने एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में चीन के शिनजियांग और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों के बीच सीमा का निर्धारण किया गया। भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी।


विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के अपने कब्जे वाले क्षेत्र से लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे शक्सगाम घाटी के नाम से जाना जाता है। भारत आज भी इसे अवैध और अमान्य समझौता मानता है। यही कारण है कि भारत के लिए चीन-पाकिस्तान सीमा संबंधी कोई भी नया तंत्र केवल दो देशों के बीच सामान्य सीमा सहयोग का मामला नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय दावे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं।