भारत ने पीओजेके में हिंसा पर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए
भारत का आरोप
नई दिल्ली: भारत ने गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान हुई कथित हिंसा को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग करना अत्यंत चिंताजनक है। भारत ने इस मामले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है और जिम्मेदार व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। इसके साथ ही, वैश्विक संस्थाओं और मीडिया से इस घटनाक्रम पर संवेदनशील और तथ्यात्मक दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया गया है.हिंसा की गंभीरता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओजेके में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनके अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.
पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों ने वहां की स्थिति को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया है। भारत के अनुसार, इन बयानों से स्थानीय लोगों के प्रति सख्त रवैया स्पष्ट होता है.
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
भारत ने कहा कि पीओजेके में हुई घटनाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वहां के नागरिकों ने भी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। भारत का कहना है कि नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की शब्दावली पर आपत्ति
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा पीओजेके के लिए 'पाकिस्तानी कश्मीर' शब्द के उपयोग पर भी आपत्ति जताई है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और संस्थानों को कानूनी और राजनीतिक तथ्यों के अनुरूप सही शब्दों का प्रयोग करना चाहिए.
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर निष्पक्ष रुख अपनाना चाहिए। साथ ही, पाकिस्तान से अपेक्षा की गई कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और हिंसा के आरोपों पर पारदर्शी कार्रवाई करे.