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भारत ने बांग्लादेश में राजनयिक तैनाती में किया बड़ा बदलाव

भारत ने बांग्लादेश में राजनयिक तैनाती को नॉन फैमिली श्रेणी में डालने का निर्णय लिया है, जिससे बांग्लादेश में चुनावों से पहले सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इस कदम ने बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की योजनाओं को विफल कर दिया है। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
 

बांग्लादेश में चुनावों की तैयारी और भारत की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। जैसे ही भारत को इस स्थिति की जानकारी मिली, उसने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भारत के खिलाफ कौन सी योजना बना रहे हैं, यह जानने के बाद भारत ने अपनी तैयारियों को पूरा कर लिया है। बांग्लादेश में चुनावों में अब कुछ ही दिन बचे हैं, और यूनुस ने चुनाव को टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने कट्टरपंथियों को भारत के खिलाफ खड़ा कर दिया है ताकि वह चीन और पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर सकें। लेकिन अब चुनाव की आहट के बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने यूनुस को सोचने पर मजबूर कर दिया है।


भारत का नया निर्णय

रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने बांग्लादेश को नॉन फैमिली राजनयिक तैनाती स्थल के रूप में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिक अब अपने परिवार के सदस्यों को अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे। पहले यह नीति केवल कुछ देशों पर लागू होती थी, जैसे इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान। अब बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल किया गया है।


फैसले का प्रभाव

यह निर्णय 1 जनवरी से प्रभावी हो गया है। बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया है कि उनके परिवार को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, उन्हें अतिरिक्त 7 दिन का समय दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, 15 जनवरी तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को कम समय में भारत लौटना पड़ा है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस निर्णय के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इस फैसले ने बांग्लादेश में भूचाल ला दिया है और यूनुस की योजनाओं को विफल कर दिया है।


भारत की सुरक्षा चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताओं के कारण उठाया गया है। यूनुस हिंदुओं और भारतीय राजनीतिकों को निशाना बना सकते थे, लेकिन भारत ने पहले ही खतरे की पहचान कर ली और यूनुस की योजनाओं को नाकाम करने के लिए यह निर्णय लिया।