भारत ने मनीला में चीन को दी कड़ी चेतावनी, व्यापार घाटा बढ़ा
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने आज मनीला में एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे चीन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के कूटनीतिक प्रतिनिधि वोंगी को स्पष्ट चेतावनी दी है कि या तो वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति स्थापित करें, अन्यथा भारत का धैर्य समाप्त हो जाएगा। यह संदेश चीन के लिए एक गंभीर संकेत है, खासकर जब भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
मनीला में भारत की उपस्थिति
मनीला, जो दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोर्चा है, पर भारत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जब दोनों देशों के विदेश मंत्री आमने-सामने थे, तो वोंगी ने सोचा होगा कि वह कूटनीतिक बातचीत से स्थिति को संभाल लेंगे। लेकिन जयशंकर ने कड़े शब्दों में कहा कि जब तक एलएसी पर स्थिरता नहीं आती, तब तक रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते।
चीन की व्यापारिक दगाबाजी
भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। चीन अक्सर भारत को महत्वपूर्ण तकनीक और मशीनरी का निर्यात रोकता है, जिससे वह व्यापार में एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश करता है। लेकिन इस बार, जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के सामने भारतीय उत्पादों के लिए निष्पक्ष बाजार की मांग रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भारत का दृढ़ रुख
जयशंकर ने मनीला में यह भी कहा कि भारत अब अपनी शर्तों पर बातचीत करेगा। उन्होंने वोंगी को बताया कि कूटनीति के क्षेत्र में भारत हर मोर्चे पर मजबूत है। लद्दाख की सीमाओं से लेकर व्यापारिक मोर्चे तक, भारत का रुख अडिग है। बीजिंग को अब यह समझना होगा कि भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।