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भारत ने विश्व मानचित्र में सुधार के लिए प्रस्ताव का समर्थन किया

भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसका उद्देश्य विश्व मानचित्र में सुधार करना है। इस प्रस्ताव का मुख्य फोकस महाद्वीपों के भूभागों को अधिक सटीकता से प्रदर्शित करना है, विशेषकर अफ्रीका का। भारत ने 'इक्वल एरिया' मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिससे भूगोल की समझ में सुधार हो सके। इस प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। जानें इस प्रस्ताव के पीछे के तर्क और भारत का दृष्टिकोण।
 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 5 सितंबर: भारत ने महाद्वीपों के भूभाग को अधिक सटीकता से प्रदर्शित करने के लिए विश्व मानचित्र में सुधार से संबंधित एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्यों ने शुक्रवार को भारी बहुमत से पारित किया। 'मानचित्र में सुधार: वैश्विक मानचित्रण प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम करना और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना' शीर्षक वाले इस प्रस्ताव को टोगो द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसमें 164 देशों ने समर्थन दिया।


मतदान में भागीदारी

एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट दिया। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि 16वीं सदी में विकसित 'मर्केटर प्रोजेक्शन' का आज भी शैक्षणिक सामग्री, मीडिया, डिजिटल प्लेटफार्मों और आधिकारिक दस्तावेजों में व्यापक उपयोग होता है, जबकि यह भूमध्य रेखा से दूर उत्तर और दक्षिण के भूभागों के आकार में विकृति दिखाता है।


भारत का रुख

भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव रघु पुरी ने मतदान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत अधिक सटीक और संतुलित मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के प्रस्ताव का स्वागत करता है। उन्होंने कहा, 'हम मानते हैं कि मानचित्रों की भूमिका समाज के भूगोल और विभिन्न हिस्सों के तुलनात्मक आकार को समझने में महत्वपूर्ण होती है।' भारत ने प्रस्ताव के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य 'इक्वल एरिया' मानचित्रण पद्धतियों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है, न कि किसी विशेष पद्धति का समर्थन करना।


विकृतियों का समाधान

पुरी ने कहा कि 'इक्वल एरिया' पद्धतियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये महाद्वीपों और क्षेत्रों के भूभागों का वास्तविक अनुपात बनाए रखती हैं। इससे उन विकृतियों को दूर करने में मदद मिल सकती है जो आकार, दिशा या दूरी जैसी भौगोलिक विशेषताओं को बनाए रखने के लिए तैयार मानचित्रण पद्धतियों के कारण उत्पन्न होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई एक पद्धति सभी उपयोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।


प्रस्ताव का महत्व

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ऐतिहासिक मानचित्रण संबंधी विकृतियों के कारण महाद्वीपों के आकार की समझ, शिक्षा, संस्कृति, भू-राजनीति और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार, इन्हें दूर करने से विशेष रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के संबंध में मान्यता, न्याय और विकास को बढ़ावा मिलेगा। पाकिस्तान ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, यह कहते हुए कि वह केवल महाद्वीपों के भूभागों को सटीक रूप से दर्शाने के मूल उद्देश्य का समर्थन करता है।