भारत ने संयुक्त राष्ट्र में धर्मांतरण पर उठाया महत्वपूर्ण मुद्दा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें धर्मांतरण को पर्यावरण के लिए खतरा बताया गया है। बीजेपी के तमिलनाडु के राज्य अध्यक्ष अश्वत्थमन अली मुथू ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों और जीवनशैलियों का होना पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान वैश्विक स्तर पर चर्चाओं का विषय बन गया है और कई देशों के धार्मिक एजेंडों को चुनौती देता है।
Jul 28, 2026, 18:46 IST
धर्मांतरण का पर्यावरण पर प्रभाव
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक ऐसा बयान दिया है, जिसने कई देशों के खतरनाक धार्मिक एजेंडों को चुनौती दी है। यह पहली बार है जब भारत ने इस मंच पर धर्मांतरण का मुद्दा उठाया है। इस बयान से ग्लोबल जिहादियों और ईसाई मिशनरियों में हड़कंप मच जाएगा। बीजेपी के तमिलनाडु के राज्य अध्यक्ष अश्वत्थमन अली मुथू ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में अचानक धर्मांतरण को पर्यावरण के लिए खतरा बताया। यह सुनकर कई देशों के प्रतिनिधि भी चौंक गए।
अश्वत्थमन ने स्पष्ट किया कि हम अक्सर ग्लोबल वार्मिंग को केवल तकनीकी और औद्योगिक दृष्टिकोण से देखते हैं, जबकि इसके सांस्कृतिक पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश में विभिन्न संस्कृतियां और जीवनशैलियां होंगी, तो पर्यावरण पर दबाव कम होगा। जैसे कि हम कई देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, इसे विभिन्न जीवनशैलियों के रूप में समझा जा सकता है। उनका तर्क है कि हम प्रकृति को देवता के रूप में मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं, जिससे हम पर्यावरण की रक्षा करते हैं।
अश्वत्थमन ने यह भी कहा कि हम पहले ही मिस्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं को खो चुके हैं, और इसका कारण धार्मिक धर्मांतरण है। वर्तमान सभ्यताओं की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। भारत एक प्राचीन जीवित सभ्यता है, और यदि यहां धार्मिक धर्मांतरण जारी रहा, तो यह भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि तेजी से हो रहे धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि भारत की धार्मिक विविधता ही पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा वरदान है।