भारत ने सऊदी अरब में पहली बार गैर-मुस्लिम राजदूत की नियुक्ति की
भारत ने सऊदी अरब में पहली बार किसी गैर-मुस्लिम राजदूत की नियुक्ति की है, जो कि एक ऐतिहासिक कदम है। पीएम मोदी के नेतृत्व में यह निर्णय खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विपुल, जो पहले से ही खाड़ी देशों में अनुभव रखते हैं, इस नई भूमिका में भारत और सऊदी अरब के बीच संबंधों को और विकसित करने में मदद करेंगे। यह कदम न केवल हज यात्रा के लिए, बल्कि व्यापार और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Jun 8, 2026, 20:18 IST
भारत का ऐतिहासिक कदम
मोदी सरकार ने सऊदी अरब में एक अनोखा कदम उठाया है, जो भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। पीएम मोदी के लिए खाड़ी देश हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष ने खाड़ी देशों में अस्थिरता और ऊर्जा संकट पैदा किया है। इस स्थिति को देखते हुए, भारत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आजादी के बाद पहली बार, भारत ने सऊदी अरब में किसी गैर-मुस्लिम राजदूत की नियुक्ति की है। पहले भारत हमेशा सऊदी अरब में मुस्लिम राजदूत भेजता था, लेकिन अब एक विशेष उद्देश्य के तहत, 2 जून 2026 को विदेश मंत्रालय ने विपुल को सऊदी अरब का अगला राजदूत नियुक्त किया है। आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि विपुल केवल अपने नाम के रूप में 'विपुल' का ही उपयोग करते हैं।
विपुल की नियुक्ति का महत्व
हालांकि विपुल के नाम से उनके धर्म का स्पष्ट पता नहीं चलता, लेकिन कई रिपोर्टों में उन्हें नॉन-मुस्लिम और पहले हिंदू एंबेसडर के रूप में उल्लेखित किया गया है। सऊदी अरब में किसी गैर-मुस्लिम राजदूत की नियुक्ति को भारत और सऊदी अरब के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। यह बदलाव दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ता है, जिसमें भारत पारंपरिक रूप से सऊदी अरब में मुस्लिम राजदूतों को नियुक्त करता आया है। यह परंपरा इसलिए थी क्योंकि हर साल लाखों भारतीय मुस्लिम हज के लिए सऊदी अरब जाते हैं, और मुस्लिम राजदूत का होना उनके लिए सुविधाजनक होता है। लेकिन अब पहली बार किसी मुस्लिम राजदूत की जगह विपुल को भेजा गया है।
भारत-सऊदी अरब के रिश्तों का विकास
यह परिवर्तन भारत और सऊदी अरब के संबंधों के विकास को दर्शाता है। अब ये संबंध केवल हज यात्रा और तेल तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी विस्तारित हो गए हैं। भारत ने देखा है कि ईरान के संघर्ष के कारण खाड़ी देश आपस में भिड़ गए हैं, और वह चाहता है कि ये देश एक-दूसरे से लड़ें नहीं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब सऊदी अरब को भी संयुक्त अरब अमीरात की तरह तकनीकी और हथियारों की बिक्री करना चाहता है, जिसके लिए विपुल को भेजा जा रहा है। विपुल पहले मिस्र में काम कर चुके हैं और 2017 से 2020 तक दुबई में भारत के काउंसिल जनरल रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने विदेश मंत्रालय में खाड़ी देशों के लिए संयुक्त सचिव के रूप में भी कार्य किया है। 2023 से, विपुल कतर में भारत के राजदूत हैं। इस प्रकार, उन्हें खाड़ी देशों की राजनीति और रणनीति का अच्छा ज्ञान है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच की दूरी को कम करने के लिए भी हो सकता है। विपुल दुबई और रियाद के बीच एक पुल का काम कर सकते हैं।