भारत-नेपाल सीमा विवाद: नेपाल ने बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया
सीमा विवाद की ताजा स्थिति
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद एक बार फिर से गंभीर हो गया है। सोमवार को, नेपाल सरकार ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराते हुए भारत के साथ संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया। यह प्रतिक्रिया भारत द्वारा नेपाल के दावों को कड़े शब्दों में खारिज करने के एक दिन बाद आई है। भारत ने लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रीय दावों का 'एकतरफा कृत्रिम विस्तार' स्वीकार्य नहीं है.
नेपाल का रुख
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि यह क्षेत्र नेपाल का है। नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'नेपाल का अपनी सीमा बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है; यह क्षेत्र नेपाल का है, और सरकार का इस बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण है और वह अपने रुख के प्रति प्रतिबद्ध है।'
समस्या का समाधान
शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री पोखरेल ने कहा कि इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच सहयोग और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से हल करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्रालय ने इस मामले की जानकारी भारत को औपचारिक पत्र के माध्यम से पहले ही दे दी है। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व रखती है।
कूटनीतिक जटिलता
लिपुलेख का मुद्दा 2020 में तब और अधिक गरमा गया जब नेपाल ने अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया। भारत इसे हमेशा से नकारता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के संबंधों और सांस्कृतिक समानता के बावजूद, यह सीमा विवाद द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक चुनौती बना हुआ है।