भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर बढ़ता तनाव
सिंधु जल संधि पर तनाव की नई लहर
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रही 'सिंधु जल संधि' (Indus Water Treaty - IWT) को लेकर हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने इस संधि को अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया, जिससे पाकिस्तान में आक्रोश फैल गया है। जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि इस्लामाबाद उन हाथों को "काट देगा" जो पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने की कोशिश करेंगे।
भारत का निर्णय और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत ने 2025 के पहलगाम हमले के बाद इस संधि को कुछ समय के लिए रोकने का निर्णय लिया। मुसादिक मलिक ने भारत पर आरोप लगाया कि वह पानी की आपूर्ति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है और चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान के जल अधिकारों को खतरा हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
पाकिस्तान का संधि का बचाव
पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा रूप से निलंबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा सुरक्षित हैं और इस संधि को निलंबित करने के भारत के प्रयास को वैश्विक स्तर पर बहुत कम समर्थन मिला है।
सिंधु जल संधि का ऐतिहासिक संदर्भ
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के बंटवारे को नियंत्रित करती है। इस समझौते के तहत, भारत पूर्वी नदियों का नियंत्रण रखता है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी मिलता है। यह समझौता कई दशकों के तनाव के बावजूद कायम रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इसे फिर से विवाद का विषय बना दिया है।
भारत का दृष्टिकोण
भारत ने अपने निर्णय का समर्थन करते हुए कहा है कि यह संधि अब वर्तमान परिस्थितियों को नहीं दर्शाती। भारत का कहना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ सहयोग की उम्मीद करना अनुचित है।